
661 करोड़ रुपये के चर्चित बैंक घोटाले में जांच तेज, फरार आईएएस अधिकारी की तलाश में जुटी सीबीआई।
पंचकूला। हरियाणा के बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में बड़ा मोड़ तब आया जब घोटाले के आरोपों से घिरे आईएएस अधिकारी प्रदीप डागर अपनी सेवानिवृत्ति से महज चार दिन पहले लापता हो गए। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। उनका मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, 2011 बैच के हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) अधिकारी प्रदीप डागर पदोन्नति के बाद आईएएस बने थे। अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक वे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) में सदस्य सचिव के पद पर कार्यरत रहे। इसी दौरान बोर्ड के बैंक खाते से 169 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आई, जिसे पूरे घोटाले की सबसे बड़ी हेराफेरी में से एक माना जा रहा है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, बैंक अधिकारियों से जुड़ी कथित शेल कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपये की राशि को बाहर निकाला गया। मामले में सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की मंजूरी प्राप्त कर ली है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
हरियाणा सरकार ने प्रदीप डागर को पहले ही परिवहन विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव पद से निलंबित कर दिया था। मामले में तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग सहित कई अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
करीब 661 करोड़ रुपये के इस चर्चित बैंक घोटाले ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में मामले में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



