
रायगढ़। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में दर्ज शिकायत के बाद पुसौर विकासखंड के एक छात्र का कक्षा 9वीं में प्रवेश तो हो गया, लेकिन इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब शिक्षा का अधिकार प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है, तब एक छात्र को विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
ग्राम खोखरा निवासी श्याम कुमार पटेल ने अपने पुत्र पवन देव पटेल के कक्षा 9वीं में प्रवेश नहीं होने की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ और तत्काल कार्रवाई करते हुए छात्र का प्रवेश शासकीय हाई स्कूल तेलीपाली में सुनिश्चित कराया गया।
हालांकि छात्र का प्रवेश होना एक सकारात्मक पहलू है, लेकिन यह घटना शिक्षा विभाग की जमीनी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न भी लगाती है। यदि विभागीय अधिकारी और विद्यालय प्रबंधन समय पर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करते, तो पालक को हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने की नौबत नहीं आती।
इस मामले के बाद पुसौर विकासखंड शिक्षा अधिकारी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी केवल शिकायत आने के बाद समाधान करना नहीं, बल्कि अधीनस्थ विद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्रधान पाठकों की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा करना भी है। यदि विद्यालय स्तर पर समस्याओं का समय रहते समाधान हो, तो पालकों और विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल प्रवेश जैसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए यदि नागरिकों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की मदद लेनी पड़े, तो यह विभागीय समन्वय और जवाबदेही की स्थिति को दर्शाता है। शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी विद्यार्थी का प्रवेश केवल जानकारी के अभाव, प्रशासनिक उदासीनता या समन्वय की कमी के कारण प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की तत्परता ने छात्र की समस्या का समाधान जरूर किया, लेकिन यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि शिक्षा विभाग को अपनी व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। ताकि भविष्य में किसी भी छात्र या पालक को अपने वैधानिक अधिकारों के लिए शिकायत तंत्र का सहारा न लेना पड़े और विद्यालय स्तर पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित हो सके।



