भगत तालाब के पार में लगे विद्युत खंभों को उखाड़ने पर उठे सवाल, बिना अनुमति शिफ्टिंग का आरोप खरसिया में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, नगरवासियों ने परमिशन और सुरक्षा प्रक्रिया की जांच की उठाई मांग!


खरसिया। नगर के भगत तालाब के पार में विद्युत विभाग द्वारा लगाए गए बिजली के खंभों को उखाड़कर तालाब में फेंकने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिक और पत्रकार सुनील अग्रवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मामले को उठाते हुए विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि तालाब के पार में लगे विद्युत खंभों को हटाने अथवा शिफ्ट करने का कार्य किसकी अनुमति और किसके आदेश से किया जा रहा है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
सुनील अग्रवाल ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया है कि आम नागरिक जब अपनी निजी जमीन या खेत में बिजली का खंभा अथवा लाइन शिफ्ट कराने के लिए आवेदन करता है, तो उसे विभागीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई बार अनुमति और औपचारिकताओं में महीनों लग जाते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि भगत तालाब के पार में विद्युत खंभों की शिफ्टिंग किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है?
उन्होंने यह भी सवाल किया है कि क्या इस कार्य के लिए विभाग से विधिवत अनुमति ली गई है? क्या बिना परमिट के लाइन और खंभों को शिफ्ट किया जा रहा है? यदि कार्य के दौरान कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

जांच और जवाबदेही की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर विद्युत लाइन और खंभों से संबंधित किसी भी कार्य में निर्धारित सुरक्षा मानकों एवं विभागीय नियमों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। यदि बिना अनुमति या आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था के कार्य किया जा रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।
सुनील अग्रवाल ने विद्युत विभाग से पूरे मामले में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही यह भी सवाल उठाया है कि खरसिया नगर में अन्य स्थानों पर भी कितने विद्युत खंभों की शिफ्टिंग बिना विभागीय अनुमति के की गई है?
अब विद्युत विभाग के जवाब का इंतजार
भगत तालाब के पार में विद्युत खंभों की शिफ्टिंग को लेकर उठे सवालों के बीच अब देखना होगा कि विद्युत विभाग इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है। क्या कार्य के लिए विधिवत अनुमति ली गई है और क्या निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है? इन बिंदुओं पर विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



