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शाला विकास समितियां भंग, अभिभावकों को मिली स्कूल संचालन की बड़ी जिम्मेदारी!

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब स्कूल प्रबंधन में जनप्रतिनिधियों का सीधा हस्तक्षेप समाप्त हो जाएगा। राज्य सरकार ने प्रदेशभर की शाला विकास समितियों (एसएमडीसी) को भंग कर नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) गठित करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन विद्यार्थियों के अभिभावकों में से किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार नई एसएमसी में 75 प्रतिशत सदस्य माता-पिता (अभिभावक) होंगे, जबकि शेष 25 प्रतिशत सदस्यों में स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षा विशेषज्ञ, पूर्व विद्यार्थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा आशा कार्यकर्ता शामिल किए जाएंगे।
नई समिति को विद्यालयों के विकास और संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। अब स्कूलों में 1 लाख रुपये तक के निर्माण एवं मरम्मत कार्यों का निर्णय समिति स्वयं कर सकेगी, जिसके लिए अलग से विभागीय अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इन कार्यों में शौचालय निर्माण एवं मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, रैंप, बिजली व्यवस्था तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल होंगे।
नई एसएमसी की प्रमुख जिम्मेदारियों में विद्यालय में नियमित बैठक आयोजित करना, विद्यार्थियों के नामांकन एवं उपस्थिति सुनिश्चित करना, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुनः मुख्यधारा से जोड़ना, मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी करना, विद्यालय विकास योजना तैयार करना तथा बच्चों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना शामिल है।
विभाग ने निर्देश दिया है कि प्राथमिक से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक माह के भीतर नई समितियों का गठन किया जाए। समिति के सदस्यों की संख्या विद्यालय में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर निर्धारित होगी।
इस निर्णय को स्कूल प्रबंधन में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने और राजनीतिक हस्तक्षेप कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Editor Hemsagar shrivas

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