सरकारी आदेश के तीन वर्ष बाद भी मांगें अधूरी, बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष !

रायपुर। बिजली विभाग में कर्मचारियों एवं अधिकारियों से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी आदेशों के जारी होने के लगभग तीन वर्ष बाद भी मांगों के पूर्ण क्रियान्वयन नहीं होने से विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। विभाग के विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है, वहीं सोशल मीडिया और व्हाट्सएप स्टेटस के माध्यम से भी कर्मचारियों का आक्रोश सामने आ रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के बिजली विभाग में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी लंबे समय से अपनी विभिन्न लंबित मांगों के निराकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार द्वारा पूर्व में किए गए वादों और जारी आदेशों का अब तक अपेक्षित लाभ उन्हें नहीं मिल पाया है, जिससे उनमें असंतोष का माहौल बन रहा है।
इधर, संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 22 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
वहीं सर्व कर्मचारी-अधिकारी यूनियन भी एकजुट होकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने, विभाग में रिक्त पड़े लगभग 10 हजार पदों पर भर्ती करने तथा कर्मचारियों से जुड़े अन्य मुद्दों के समाधान को लेकर रणनीति तैयार कर रही है। संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि पर्याप्त भर्ती नहीं होने के कारण कार्यरत कर्मचारियों पर कार्यभार लगातार बढ़ रहा है, जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुरूप मानव संसाधनों की नियुक्ति नहीं होने से विभागीय कार्यों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती और कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है।
कर्मचारियों और अधिकारियों की निगाहें अब कंपनी प्रबंधन और सरकार पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में वार्ता और आंदोलन की दिशा क्या रूप लेती है, इस पर पूरे विभाग की नजर बनी हुई है। फिलहाल कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने के संकेत दिए हैं।



