केलो धारा रायगढ़ फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी के निदेशक बिहान दीदियों का राशन कार्ड से नाम कटा, कहीं लखपति दीदियों का भी न कट जाए ?

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं दीदियां अब खाद्यान्न से वंचित, बिहान समूहों में चर्चा का विषय बना मामला
रायगढ़। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से लगातार जागरूक किया जा रहा है। बिहान योजना के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने तथा परिवार, समाज और देश के विकास में भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन रायगढ़ जिले में सामने आए एक मामले ने महिला सशक्तिकरण की इस प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में महिलाओं को कृषि एवं उद्यमिता से जोड़ने के लिए केलो धारा रायगढ़ महिला फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया है। इस कंपनी में करीब 10 बिहान दीदियों को निदेशक के रूप में शामिल किया गया है। इन महिलाओं की भूमिका केवल कंपनी के संचालन और प्रबंधन तक सीमित है। कंपनी की संपत्ति या आय पर उनका कोई व्यक्तिगत मालिकाना हक नहीं है और न ही उन्हें इससे कोई निजी आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
बताया जा रहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले खाद्यान्न से इन 10 निदेशक महिलाओं के नाम राशन कार्ड से हटा दिए गए हैं। इसके बाद से बिहान समूहों और महिला स्व-सहायता समूहों में चिंता का माहौल बन गया है। महिलाओं के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि यदि फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी में जिम्मेदारी निभाने वाली निदेशक दीदियों का नाम राशन कार्ड से काटा जा सकता है, तो कहीं भविष्य में “लखपति दीदी” या अन्य सक्रिय महिला समूह सदस्यों के नाम भी राशन कार्ड से न हटा दिए जाएं।
बिहान से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि सरकार एक ओर महिलाओं को नेतृत्व और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसी कार्रवाई से महिलाओं में भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। इससे महिला सशक्तिकरण की योजनाओं के प्रति विश्वास भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इधर, केलो धारा रायगढ़ महिला फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की अध्यक्ष तेजमती सारथी ने जिला खाद्य अधिकारी को आवेदन देकर पूरे मामले की जानकारी दी है। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि निदेशक महिलाओं को कंपनी से कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं मिलता और उन्हें राशन कार्ड की पात्रता से वंचित करना उचित नहीं है। उन्होंने संबंधित महिलाओं के नाम पुनः राशन कार्ड में जोड़ने की मांग करते हुए शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और खाद्य विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं। फिलहाल यह मुद्दा रायगढ़ जिले के बिहान समूहों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और महिलाएं प्रशासन के निर्णय का इंतजार कर रही हैं।



