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नंदेली मे कच्चा मकान ढहने से महिला की मौत, व्यवस्था समय पर बन जाता प्रधानमंत्री आवास, तो शायद बच जाती एक गरीब महिला की जान” पर उठे सवाल ?


पुसौर/नंदेली। पुसौर तहसील क्षेत्र के ग्राम नंदेली में लगातार बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे में कच्चा मकान ढह जाने से एक महिला की मौत हो गई, जबकि उसका पति और 12 वर्षीय पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना ने एक बार फिर गरीब परिवारों के लिए स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के समय पर निर्माण और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम नंदेली निवासी रतन दास महंत का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हो चुका था तथा राशि आहरण की प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी। इसके बावजूद नया मकान समय पर नहीं बन सका और परिवार मजबूरी में जर्जर कच्चे मकान में रहने को विवश था। लगातार बारिश के कारण कमजोर हो चुका मकान बीती रात लगभग 3 बजे भरभराकर गिर गया।
हादसे में रतन दास महंत की पत्नी रोहिणी महंत (35 वर्ष) मलबे में दब गईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं रतन दास महंत एवं उनका 12 वर्षीय पुत्र शिवम गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दोनों घायलों को मलबे से बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल भेजा, जहां उनका इलाज जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को जल्द से जल्द पक्का आवास उपलब्ध कराने तथा निर्माण कार्य में अधिकारियों द्वारा सहयोग सुनिश्चित करने की बात करता है, ताकि कोई भी गरीब परिवार असुरक्षित कच्चे मकानों में रहने को मजबूर न हो। लेकिन कई मामलों में तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित मॉनिटरिंग और निर्माण कार्य में आवश्यक सहयोग समय पर नहीं मिलने से स्वीकृत आवास भी वर्षों तक अधूरे रह जाते हैं।
यह घटना इस सवाल को भी जन्म देती है कि जब आवास स्वीकृत था और राशि की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तब निर्माण कार्य समय पर क्यों नहीं हो सका? यदि नया आवास समय पर बन गया होता तो संभवतः एक परिवार की खुशियां उजड़ने से बच सकती थीं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं जनपद पंचायत से मामले की जांच कर जिम्मेदार कारणों की पड़ताल करने तथा प्रभावित परिवार को उचित सहायता प्रदान करने की मांग की है।
पुलिस ने मर्ग कायम कर पंचनामा कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं क्षेत्र में इस दुखद घटना के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और विभागीय जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

Editor Hemsagar shrivas

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