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शिक्षक दिवस पर विशेष लेख नेतराम साहू की ✒से…* *शिक्षक दिवस, शिक्षकों के सम्मान के साथ-साथ आत्म चिंतन का दिवस है – नेतराम साहू*

 

रायगढ़ : डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस 5 सितंबर को वर्ष 1962 से प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। जब डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी स्वतंत्र भारत देश के द्वितीय राष्ट्रपति बने तो उनके 74 वां जन्म दिवस को शिक्षकों को समर्पित कर “शिक्षक दिवस” मनाने हेतु कहा।
भारत देश के महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म एक तेलुगू ब्राह्मण परिवार में तिरुतनी, मद्रास भारत में 5 सितंबर सन 1888 को हुआ। उनका बाल्यकाल तिरुतनी एवं तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों पर ही व्यतीत हुआ। प्रथम 8 वर्ष तिरुतनी गांव में ही गुजारे। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रारंभिक शिक्षा क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथार्न मिशन स्कूल तिरुपति में 1896- 1900 के मध्य हुई। 1900 – 1904 तक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने वेल्लूर में शिक्षा ग्रहण किया। तत्पश्चात मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज मद्रास में शिक्षा ग्रहण किया। उन्होंने दर्शनशास्त्र में एम ए किया। सन 1916 में मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक अध्यापक नियुक्त हुए। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बचपन से ही मेधावी थे । अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को दर्शनशास्त्र से परिचित कराया। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। शिक्षा में अटूट विश्वास रखते थे । वे जाने-माने विद्वान, राजनीतिज्ञ, महान दार्शनिक थे। वे महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उनको अध्यापन कार्य से बहुत ही लगाव था। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन मात्र 21 वर्ष की आयु में 1909 में मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज में व्याख्याता के पद पर नियुक्त होकर अपना शिक्षण कार्य प्रारंभ किया था। वर्ष 1931 में आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय के उप कुलपति बने। अपने 5 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने आंध्रप्रदेश यूनिवर्सिटी को उत्कृष्ट विश्वविद्यालय का स्वरूप दिया। वे पं. मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उप कुलपति के पद पर भी रहे। भारत देश अंग्रेजों से 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ तब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भारतीय शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए अनेकों प्रयास किया। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन 13 मई 1952 से 12 में 1962 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे। वे 13 मई 1962 से 13 मई 1967 तक भारत देश के द्वितीय राष्ट्रपति रहे। उनका निधन 86 वर्ष की उम्र में 17 अप्रैल 1975 को हुई। शिक्षा जगत में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम सदैव याद रहेगा।
*डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी न केवल एक शिक्षक थे, न केवल एक राजनीतिज्ञ थे,न केवल स्वतंत्रता सेनानी थे, न केवल महान दार्शनिक थे बल्कि “सादा जीवन उच्च विचार” के प्रतीक एक “साधना संपन्न ऋषि पुरुष” थे।*
डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि “सिर्फ जानकारियां देना ही शिक्षा नहीं है शिक्षा का लक्ष्य ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरंतर सीखने रहने की प्रवृत्ति होती है। शिक्षा को सही तरह से दिया जाए तो समाज में कई प्रकार की बुराइयों को समाप्त किया जा सकता है।

*सच्चा शिक्षक वही है जो जीवन पर्यंत विद्यार्थी होता है।*

*शिक्षक तीन अक्षर का एक शब्द ही नहीं है बल्कि यह शिवमय, क्षमामय, कल्याणमय होता है।*

*शिक्षक दिवस शिक्षकों का सम्मान दिवस ही नहीं बल्कि आज का दिन शिक्षकों के लिए भी आत्म चिंतन व आत्म मंथन का दिवस होता है।*

शिक्षक कभी भी सेवानिवृत्त नहीं होता। वह समाज के प्रति अपना दायित्व, अनुभव के आधार पर सदैव मार्गदर्शन का कार्य करता है।
*वृद्ध, वृद्ध नहीं होते अपने आप में विद्यालय होते हैं और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी तो विश्वविद्यालय के समान थे।*
इसलिए गुरु को ईश्वर से भी महान माना गया है।
कबीर कहते हैं-
गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय।।

गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है, गढ़ि गढ़ि काढे खोट।
अंदर से सहार देत, बाहर मारे चोट।।
शिक्षक जीवन एक दर्पण है।
छात्रों के लिए समर्पण है।
शिक्षक चरित्र महान है।
ईश्वर स्वयं करता गुणगान है।

*तूफानों के रेगिस्तान में बरसात लेकर चलते हैं।*
*जलाते हैं खुद को लेकिन रोशनी की सौगात लेकर चलते हैं।।*

*वह प्रज्ञा कहां जिसे हमने ज्ञान के ग्रंथो में खो दिया।*
*वह ज्ञान कहां जिसे हमने तथ्यों के जाल में खो दिया।*
*वह जीवन कहां जिसे हमने जीने के प्रपंच में खो दिया।*

*दुनिया के समस्त गुरुजनों, वैज्ञानिकों, रसायनज्ञों, मेरे शैक्षिक गुरुजन, आध्यात्मिक गुरु को सादर प्रणाम।*

*आज हम, हम हैं तो अपने गुरु के बदौलत….*

*समस्त शिक्षक वृंद को “शिक्षक दिवस” की बहुत-बहुत बधाई हो।*
आइये हम सब मिलकर एक अच्छी दुनिया, विकसित भारत देश,विकसित छत्तीसगढ़ प्रदेश बनाएं।
🙏🙏🙏
नेतराम साहू
व्याख्याता (रसायन)
शा.उ. मा. वि. तरकेला, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
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Editor Hemsagar shrivas

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