
रायगढ़ | वर्ष 2018 में जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई, तब सबसे पहले राज्य की लाखों माताओं-बहनों के रोजगार पर गहरा आघात किया गया। ‘रेडी टू ईट’ योजना, जो महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित होती थी, उसे ठेकेदारों को सौंप दिया गया।
इस निर्णय से लगभग 20,000 से अधिक महिलाएं बेरोजगार हो गईं, और उनके पेट पर आर्थिक मार पड़ी। यह कदम केवल कमीशनखोरी और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की मंशा से उठाया गया था, जो कांग्रेस की कार्यशैली को उजागर करता है।
कांग्रेस की इस नीति ने न केवल राज्य की महिलाओं को उनके हक से वंचित किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण के खिलाफ एक सीधा हमला भी माना गया।
अब जब वर्तमान सरकार ने यह योजना पुनः महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने का निर्णय लिया है, और उन्हें उनका पुराना हक वापस मिल रहा है, तो वही लोग विरोध की राजनीति कर रहे हैं, जिन्होंने कभी महिलाओं से यह अधिकार छीना था।
यह प्रकरण कांग्रेस के चाल, चरित्र और चेहरा को स्पष्ट करता है — जहां जनहित से अधिक निजी लाभ और कमीशन की राजनीति प्राथमिकता बन चुकी थी।



