ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु “आरईएम” के मार्गदर्शन कार्यक्रम संपन्न !

लैलूंगा :- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के विकास खण्ड लैलूंगा में नाबार्ड एवं आईएसडीजी रिसर्च संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ग्रामीण उधमिता मार्गदर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन शासकीय मंगल भवन, लैलूंगा में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक डीडीएम माइलोर बड़ा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में I आईएसडीजी रिसर्च संस्थान रांची के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। नाबार्ड के डीडीएम ने अपने संबोधन में ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार तथा उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं सफल कार्यों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए ग्रामीण उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डाला गया । साथ ही छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक एवं भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिये वहीं बैंक के अधिकारियों ने उद्यम स्थापना हेतु उपलब्ध ऋण सुविधाओं एवं बैंकिंग प्रक्रियाओं की विधिवत जानकारी दी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। लैलूंगा के विशेष चयनित उद्यमियो को तकनीकी जानकारी, बैंक लिंकेज और व्यवसाय को आगे बढ़ने में सहायता करना है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को आत्मनिर्भर बनाना, स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण उद्यमियों को बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थाओं से जोड़ना है।
इस ग्रामीण उद्यमिता मार्गदर्शन कार्यक्रम मे नाबार्ड और आईएसडीजी रिसर्च फाउन्डेशन उद्यमियों के साथ 18 महीनों तक जुड़े रहेंगे तथा उन्हें व्यवसाय स्थापना, प्रबंधन, वित्तीय संस्थाओं से समन्वय, बाजार संपर्क, क्षमता विकास एवं उद्यम संचालन संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करेंगे।
कार्यक्रम में सलखिया, पाकरगांव, ढाप, भेलवांटोली, भवानीपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया गया। प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास, स्वरोजगार के अवसरों, बैंक ऋण, वित्तीय प्रबंधन तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपनी उद्यम यात्रा एवं अनुभव साझा किए गए। उपस्थित उद्यमियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की गई है।



