

खरसिया, 6 अक्टूबर 2025।
लोक संस्कृति और परंपरा से ओतप्रोत ग्राम नंदगांव (राम बहार) में रविवार, 5 अक्टूबर को भव्य दशहरा सुआ नृत्य उत्सव का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया गया।कार्यक्रम में क्षेत्रभर से आए सुआ नृत्य दलों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने लोकगीतों की धुन पर झूमकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
विशिष्ट अतिथियों ने की शिरकत

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रविन्द्र प्रकाश गवेल बतौर मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मंच से प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि “सुआ नृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, ऐसे आयोजनों से ग्रामीण परंपरा सशक्त बनती है।”
इस अवसर पर प्रमुख रूप से
श्रीमति रजनी संजय राठिया (जिला पंचायत सदस्य),
श्रीमती मालती घनश्याम राठिया (ब्लॉक विकास समिति सदस्य),
श्रीमति प्रिया सियाराम राठिया (सरपंच नंदगांव),
श्रीमति जगमति राठिया (उपसरपंच),
श्री भूपेंद्र वर्मा (जिला कार्य समिति सदस्य),
शनिराम राठिया (रावण समिति अध्यक्ष)
और अध्यक्ष श्रवण डनसेना सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन समिति का सराहनीय योगदान
कार्यक्रम के सफल संचालन में मंगल, मुन्ना, गणपत, संतोष, भोलन, अजम्बर, गजेन्द्र, भारत, चंद्रशेखर, भवानी सहित आयोजन समिति के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सभी ने सामूहिक सहयोग से कार्यक्रम को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। विजेताओं को मिला सम्मान
सुआ नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी दलों ने अपनी कला से समा बाँध दिया। निर्णायक मंडल द्वारा चयनित विजेता दलों को आकर्षक नकद पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
शाम को मंच पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में सभी विजेताओं का सम्मान हुआ, जहां तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा।

लोक संस्कृति को जीवंत रखने का प्रयास किया।आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपरा को जीवित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सुआ नृत्य प्रेमी मौजूद रहे।
पूरा नंदगांव इस अवसर पर सांस्कृतिक रंगों और लोकगीतों की मधुर लहरियों से सराबोर नजर आया।
दशहरा पर्व के साथ सुआ नृत्य की यह संगममयी छटा देर रात तक लोगों को मंत्रमुग्ध करती रही।



