रायगढ़/पुसौर।
वित्त मंत्री के क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला जनपद पंचायत पुसौर इन दिनों चर्चाओं में है। कारण — जनपद में चल रही कई जांचें जिनका नतीजा महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक सामने नहीं आया है। शिकायतकर्ता द्वारा इस बात को लेकर भारी असंतोष देखा जा रहा है कि जनपद के सक्षम अधिकारी जांच के बाद भी निर्णय नहीं ले रहे हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पुटकापुरी में बैंक मित्र के मनमानी व्यवहार और स्व-सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार को लेकर बिहान के दीदियों ने शिकायत की थी। शिकायत दर्ज हुए कई सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन जनपद से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी तरह ग्राम गोर्रा में पशु सखी और कृषि सखी के चयन में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने चयन प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाते हुए सक्षम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था। जांच शुरू तो हुई, लेकिन रिपोर्ट आज तक लंबित है।
वहीं ग्राम पंचायत कठानी में तत्कालीन सचिव द्वारा निर्माण कार्यों में फर्जीवाड़े और राशि दुरुपयोग का मामला सामने आया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि 15वें वित्त आयोग की राशि का गलत उपयोग किया गया। शिकायत के बाद जांच टीम तो पहुंची, मगर निर्णय आज तक कागजों में ही सीमित है।
ग्रामीणों का कहना है कि “जनपद पंचायत पुसौर अब पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा है। अधिकारी जांच तो कर रहे हैं, लेकिन परिणाम कभी सामने नहीं आता।” वहीं कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि शायद “जांच को जानबूझकर रोका जा रहा है, ताकि कमीशनखोरी का रास्ता खुला रहे !
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि जांच प्रणाली में पारदर्शिता नहीं आई, तो जनता का भरोसा प्रशासन से उठ जाएगा। सभी लंबित जांचों का शीघ्र निराकरण किया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
इस बीच, पुसौर जनपद के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। अब देखने वाली बात होगी कि क्या वित्त मंत्री के क्षेत्र के इस जनपद में वास्तव में पारदर्शिता की पहल होती है या फिर मामले यूं ही ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।



