मनरेगा में “हरा घोटाला”: रायगढ़ जनपद की पंचायत में काग़ज़ों पर लहलहाते पेड़, ज़मीन पर सन्नाटा!

रायगढ़ :- जनपद पंचायत रायगढ़ के अंतर्गत एक पंचायत में मनरेगा के तहत कराए गए वृक्षारोपण कार्य में बड़े भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है। सरकारी रिकॉर्ड में जहाँ हरियाली दिखाई जा रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत में एक भी पौधा मौजूद नहीं है। आरोप है कि सत्ता की भूख में कुछ स्थानीय नेता, पंचायत प्रतिनिधि, रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक और सत्यापन अधिकारी मिलकर वर्षों से मनरेगा राशि की खुली बंदरबांट करते आ रहे हैं।
प्रस्तावित वृक्षारोपण स्थल पर जब मौके की पड़ताल की गई तो हालात चौंकाने वाले निकले। आसपास मौजूद करीब दस ग्रामीणों से जब पौधारोपण के बारे में पूछा गया, तो सभी ने एक सुर में कहा—“साहब, यहाँ तो कभी पौधा लगाया ही नहीं गया।” ग्रामीणों का दावा है कि यह खेल नया नहीं है, बल्कि लंबे समय से इसी तरह फर्जी तरीके से कार्य दिखाकर भुगतान निकाला जा रहा है।
मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, लेकिन यहाँ योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। काग़ज़ों में लाखों रुपये खर्च दिखाकर पौधारोपण पूरा बताया गया, जबकि ज़मीन पर न गड्ढे हैं, न पौधे और न ही कोई देखरेख।
सूत्रों के अनुसार, जल्द ही इस पूरे मामले का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। सिर्फ रायगढ़ जनपद ही नहीं, बल्कि जनपद पुसौर में सामने आ चुके मामलों की तरह यहाँ भी तथाकथित विकास के नाम पर किए गए कारनामों को सार्वजनिक किया जाएगा। सवाल यह है कि जब सत्यापन से लेकर तकनीकी जांच तक सब कुछ काग़ज़ों में सही दिखाया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही?
अब ज़रूरत है निष्पक्ष जांच की, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना को लूट का जरिया बनाने वालों को बेनकाब किया जा सके। जनता जवाब चाहती है—पेड़ कहाँ गए?



