“जनसूचना अधिकारी बीईओ की चुप्पी संदिग्ध: पुसौर शिक्षा विभाग में RTI पर उठे गंभीर सवाल”

रायगढ़: पुसौर विकास खंड का शिक्षा विभाग एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। लगातार विवादों में घिरा यह विभाग अब पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी कठघरे में खड़ा नजर आ रहा है। बीईओ के पदभार ग्रहण करने के बाद से ही विभाग सुर्खियों में बना हुआ है—चाहे वह ब्लूप्रिंट प्रशिक्षण में अनियमितता हो, शिक्षकों पर दबाव की शिकायतें हों या फिर स्कूलों के निरीक्षण की लचर व्यवस्था।
ताजा मामला सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़ा है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर और भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विकलांग आरक्षण के तहत नियुक्त शिक्षकों एवं कार्यालय में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन 30 दिन बीत जाने के बाद भी जन सूचना अधिकारी—जो कि स्वयं बीईओ हैं—ने कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। यह सीधे-सीधे सूचना के अधिकार कानून का उल्लंघन माना जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिस विषय की जानकारी पुसौर बीईओ नहीं दे पा रहे हैं, उसी विषय पर रायगढ़ के बीईओ कार्यालय द्वारा जानकारी पहले ही प्रदान की जा चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पुसौर में जानकारी छिपाने की मंशा क्या है?
क्या विभाग में विकलांग आरक्षण के नाम पर गड़बड़ी हुई है? क्या नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां की गई हैं? या फिर कुछ अधिकारियों को बचाने के लिए जानबूझकर जानकारी रोकी जा रही है? यह संदेह अब और गहराता जा रहा है।
यदि समय रहते पारदर्शिता नहीं दिखाई गई, तो यह मामला बड़े स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग करेगा। जनता अब जवाब चाहती है—और जवाब देना ही होगा।



