जनपद पंचायत पुसौर बना भ्रष्टाचार का गढ़, अक्षम अधिकारियों की*सरपरस्ती में खुला लूट का खेल*!

रायगढ़:-*जनपद पंचायत पुसौर आज विकास का केंद्र नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का गढ़ बनता जा रहा है। यहां मनरेगा से लेकर* एनआरएलएम और* *सूचना के अधिकार तक—हर योजना में अनियमितताओं की बदबू साफ महसूस की जा सकती है। सबसे गंभीर* *सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर यह सब कैसे होने दे रहे हैं, या फिर उनकी मौन सहमति से यह खेल फल-फूल रहा है?*
*मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। कागजों में वृक्षारोपण दिखाकर लाखों रुपये की फर्जी राशि का आहरण किया गया, जबकि जमीनी हकीकत में न पेड़ हैं* *और न ही मजदूरी का कोई ठोस प्रमाण। एनआरएलएम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के नाम पर ब्याज घोटाले की शिकायतें भी सामने आ* *रही हैं। समूहों को मिलने वाली राशि और ब्याज में भारी अनियमितता का आरोप है, लेकिन अब तक कोई ठोस* *कार्रवाई नहीं की गई। इससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की योजना को ही पलीता लगाया जा रहा है।*
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जनपद पंचायत पुसौर का जन सूचना अधिकारी सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी देने में पूरी तरह अक्षम नजर आ रहा है। समय पर जानकारी न देना, अधूरी सूचना देना *या आवेदन को टालना—यह सब पारदर्शिता पर सीधा हमला है।
*अलावा फर्जी भूमिहीन पात्र* *हितग्राही सूची बनाकर प्रशासन को* भेजने का मामला भी उजागर हुआ है*, *जिससे योजनाओं का लाभ गलत लोगों तक पहुंचाया गया। सवाल यह है कि इतने गंभीर मामलों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?*
*यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो जनपद पंचायत पुसौर भ्रष्टाचार का स्थायी प्रतीक बन जाएगा। अब जरूरत है* *निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और जनता के विश्वास को बहाल करने की—वरना विकास केवल फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।*



