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तीन दिन का अल्टीमेटम: क्या पुसौर के सीईओ जनसूचना अधिकारी देंगे पूरी जानकारी?”

रायगढ़। जनपद पंचायत पुसौर की एनआरएलएम (बिहान) शाखा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वित्तीय वर्षवार तीन बिंदुओं पर सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत एक आवेदक द्वारा जानकारी मांगी गई थी, लेकिन निर्धारित 30 दिनों की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी जनसूचना अधिकारी द्वारा सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे स्पष्ट है कि पारदर्शिता के दावों के बीच सूचना देने में गंभीर लापरवाही बरती गई।
समय पर जवाब न मिलने पर आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं जिला पंचायत सीईओ के समक्ष अपील प्रस्तुत की। सुनवाई के दौरान आवेदक का बयान लिया गया, जिसमें मांगी गई जानकारी को पूरी तरह उचित और अधिनियम के अनुरूप पाया गया। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए जनसूचना अधिकारी सह सीईओ, जनपद पंचायत पुसौर को तीन दिवस के भीतर निःशुल्क एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन-सी जानकारी है जिसे देने में टालमटोल की जा रही है? क्या वित्तीय वर्षवार अभिलेखों में कोई अनियमितता छुपी है? या फिर जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं? यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो सूचना देने में हिचकिचाहट क्यों?
सूचना का अधिकार अधिनियम आम नागरिक को शासन की कार्यप्रणाली पर नजर रखने का संवैधानिक औजार देता है। ऐसे में जानकारी छुपाने या विलंब करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा आघात मानी जाएगी। अब देखने वाली बात होगी कि जिला सीईओ के स्पष्ट निर्देश के बाद भी जनसूचना अधिकारी आदेश का पालन करते हैं या फिर निर्देशों की अवहेलना कर मामले को और संदेहास्पद बनाते हैं। जनता की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

Editor Hemsagar shrivas

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