जमीन घोटाले में बड़ा एक्शन: तहसीलदार समेत 7 पर धोखाधड़ी का केस दर्ज !

बांदा। जिले से बड़ी चौंकाने वाली खबर है। अतर्रा तहसील क्षेत्र के पचोखर गांव में “जमीन के बड़े फर्जीवाड़े” का “सनसनीखेज मामला” सामने आया है। करीब 35 वर्ष पहले दानपत्र और बैनामे से “खरीदी जा चुकी जमीन” को अभिलेखों की “खामी का फायदा उठाकर” दोबारा बेच दिया गया। इस पूरे प्रकरण में “राजस्व विभाग की भूमिका संदेह के घेरे” में आ गई। न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार, सब-रजिस्ट्रार,हल्का लेखपाल समेत सात लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी” का “मुकदमा दर्ज” किया गया है। मामला सामने आते ही राजस्व महकमे में हड़कंप मच गया है।
ग्राम पचोखर निवासी आनंदी प्रसाद ने इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दायर किया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता रामेश्वर ने गाटा संख्या 1151, रकबा 1.55 एकड़ में तीन चौथाई हिस्सा 23 अगस्त 1990 को अपने सगे भाई शंभू दयाल से विधिवत पंजीकृत दानपत्र के माध्यम से प्राप्त किया था। इसके बाद शेष भूमि 23 जून 1994 को बैनामे के जरिए खरीदी गई थी। इन दोनों लेनदेन के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण भी दर्ज कर दिया गया था।
करीब 13 वर्ष पहले पिता रामेश्वर के निधन के बाद वरासत की प्रक्रिया के तहत यह जमीन आनंदी प्रसाद के नाम खतौनी में दर्ज हो गई।वह लगातार जमीन पर काबिज रहे। लेकिन राजस्व अभिलेखों में हुई एक बड़ी लापरवाही ने पूरे मामले को विवाद में बदल दिया। आरोप है कि फसली वर्ष 1430 से 1435 तक अभिलेखों में शंभू दयाल का नाम भी दर्ज बना रहा। इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर गांव के ही रामप्रकाश ने 23 जून 2024 को अपनी पत्नी दीपा देवी के नाम उसी जमीन का दोबारा बैनामा करा लिया।
बताया जाता है कि इस बैनामे में गवाह के रूप में राजनगर निवासी रामप्रकाश और ग्राम पनगरा के जगदीश प्रसाद के नाम दर्ज हैं। पीड़ित आनंदी प्रसाद को इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई जब उन्होंने 20 सितंबर 2025 को खतौनी की नकल निकलवाई। दस्तावेजों में जमीन के दोबारा बैनामे की जानकारी देखकर वह हैरान रह गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस और उच्चाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कहीं से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आखिरकार पीड़ित को न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने जांच के आदेश देते हुए संबंधित अधिकारियों और आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालत के आदेश पर गुरुवार को तत्कालीन तहसीलदार नरैनी लखन लाल, अज्ञात सब-रजिस्ट्रार, हल्का लेखपाल पंकज अवस्थी तथा रामप्रकाश, दीपा देवी, जगदीश प्रसाद और रामप्रसाद के विरुद्ध धोखाधड़ी और कूटरचना का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अतर्रा थाना प्रभारी संजीव चौबे ने बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की गहन विवेचना शुरू कर दी गई है।



