तारापुर सुशासन तिहार शिविर में दिखी उदासीनता: शिकायतें देने पहुंचे लोग, भाषण सुनने में नहीं दिखी रुचि!

खरसिया। खरसिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम तारापुर में शनिवार 6 जून 2026 को सुशासन तिहार के अंतर्गत शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में क्षेत्र के लगभग 20 गांवों के ग्रामीण अपनी शिकायतें एवं मांग संबंधी आवेदन लेकर पहुंचे। प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी देने और समस्याओं के निराकरण के लिए शिविर आयोजित किया गया था।
हालांकि शिविर के दौरान एक दिलचस्प तस्वीर भी सामने आई। बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें और मांगों के आवेदन जमा कराने तो पहुंचे, लेकिन मंच से दिए जा रहे प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के संबोधनों को सुनने के लिए कुर्सियों पर बैठने में विशेष रुचि नहीं दिखाई। कई लोग आवेदन जमा करने के बाद तत्काल वापस लौटते नजर आए।



जब कुछ ग्रामीणों से इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि वे अब केवल घोषणाएं और आश्वासन सुनने के बजाय कार्यों का परिणाम देखना चाहते हैं। ग्रामीणों का कहना था कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए वादे धरातल पर दिखाई नहीं देते, जिससे लोगों का भरोसा कम हुआ है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि लंबे भाषणों के बजाय समस्याओं का त्वरित समाधान अधिक महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जनकल्याणकारी कार्यक्रम की सफलता केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जनता के विश्वास पर निर्भर करती है। यदि लोग योजनाओं की जानकारी सुनने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, तो यह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए आत्ममंथन *का विषय हो सकता है।*
सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच संवाद स्थापित करना है, लेकिन तारापुर शिविर में दिखाई पड़ी यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि अब जनता केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक परिणाम और जवाबदेही देखना चाहती है।*



