चक्रधर समारोह : पंडवानी में जीवंत हुआ द्रौपदी चीरहरण का मार्मिक प्रसंग* *तरुणा साहू की प्रस्तुति से भाव-विभोर हुए दर्शक*

*चक्रधर समारोह : पंडवानी में जीवंत हुआ द्रौपदी चीरहरण का मार्मिक प्रसंग*
*तरुणा साहू की प्रस्तुति से भाव-विभोर हुए दर्शक*
रायगढ़, 15 सितम्बर 2026/ चक्रधर समारोह के मंच पर मंगलवार की शाम छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला पंडवानी की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। रेलवे सुरक्षा बल, राजनांदगांव में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत श्रीमती तरुणा साहू ने महाभारत के मार्मिक प्रसंग ‘द्रौपदी चीरहरण’ को पंडवानी के माध्यम से जीवंत कर दिया। सुर, ताल और भाव के साथ उन्होंने इस प्रसंग को इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक भाव-विभोर हो गए।

तरुणा साहू का पंडवानी से जुड़ाव वर्ष 1994 से है। जवाहर नवोदय विद्यालय में अध्ययन के दौरान उन्हें पंडवानी की महान कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई के सान्निध्य में पंडवानी सीखने का अवसर मिला। गुरु तीजन बाई के साथ उन्होंने दिल्ली, भोपाल, उज्जैन के कालिदास समारोह सहित देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी। उनकी कला-साधना को वर्ष 2005 में लोक एवं पारंपरिक कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति मिली। वर्ष 2024 में अयोध्या महोत्सव में पंडवानी प्रस्तुति के साथ उन्हें आइकॉनिक ऑनरेरी डॉक्टरेट अवॉर्ड और शक्ति सम्मान-2024 से भी सम्मानित किया गया।
कला के साथ तरुणा साहू अपनी वर्दी की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। बच्चों के रेस्क्यू, सुरक्षा और जनजागरूकता अभियानों में भी उनका सक्रिय योगदान रहा है। एक ओर वे पंडवानी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर वर्दी के जरिए समाज की सेवा और सुरक्षा का दायित्व निभा रही हैं। मंच पर ‘द्रौपदी चीरहरण’ की प्रस्तुति के दौरान दर्शक महाभारत के इस मार्मिक प्रसंग से जुड़े नजर आए। प्रस्तुति के अंत में दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। इस प्रस्तुति में बैंजो पर श्री हर्ष मेश्राम (स्वास्थ्य विभाग) और हारमोनियम पर टीकाराम गेंदले (शिक्षा विभाग) ने संगत दी।



