बंगीय समाज रायगढ़ द्वारा सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाई गई |

बंगीय समाज रायगढ़ द्वारा माँ सरस्वती की पूजा पूरे हर्षो उल्लास के साथ मनाई गई |
जिसमे विशेषकर बच्चो ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया,साथ ही समाज के सभी सदस्यों द्वारा कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु पूर्ण सहयोग प्रदान किया गया |
पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का कार्य संपन्न कर दिया तो उन्होंने पाया कि सृष्टि में सबकुछ है, लेकिन सब मूक, शांत और नीरस है. तब उन्होंने अपने कमंडल से जल निकाला और छिड़क दिया, जिससे मां सरस्वती वहां पर प्रकट हो गईं. उन्होंने अपने हाथों में वीणा, माला और पुस्तक धारण कर रखा था.
सुबह माँ सरस्वती की प्रतिमा के विधिवत पूजन के साथ ही प्रसाद एवं माँ के भोग का वितरण किया गया | शाम के समय माँ सरस्वती की संध्या आरती के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया एवं दूसरे दिन सुबह विधिवत पूजा अर्चना के बाद प्रतिमा का विसर्जन किया गया |
बंगीय समाज के सचिव रितेश दत्ता ने बताया की बंग समाज में सरस्वती पूजा का विशेष महत्त्व है इस अवसर पर जितने भी विद्यार्थी, लेखक, कवि, गायक, वादक और साहित्य व कला जगत से जुड़े लोग है वे सुबह से ही उपवास रखते है एवं माँ सरस्वती की पूजा एवं पुष्पांजलि के उपरांत ही फलाहार तथा भोग ग्रहण करते है |
वैसे तो माँ की पूजा घर पर ही की जाती है परन्तु आज के भाग दौड वाले समय में विधिवत पूजा अर्चना करना तोड़ा मुश्किल हो जाता है, इसी करण बंगीय समाज रायगढ़ ने इसे एक साथ एक ही प्रांगड़ में करने का निर्णय लिया है | ताकि सभी सदस्य एवं नगर वाशी साथ मिलकर हर्षो उल्लास के साथ इस पर्व का आनंद ले सके |



