अडानी जिसने पुसौर में प्रदूषण बढ़ाने की ठानी,ग्रामीण है परेशान, अडानी के गांव गांव में पुरजोर विरोध

अडानी जिसने पुसौर में प्रदूषण बढ़ाने की ठानी,ग्रामीण है परेशान
रायगढ़ग्रामीणों के विरोध को किया दरकिनार, कर रहा मनमानीअधिग्रहण के खेल में माहिर अडानी ग्रुप अब पुसौर को भी तमनार की तरह उजाड़ने की ठान चुका है। पुसौर, किसानों का अंचल जहां कृषि ही ग्रामीणों की जीवनरेखा है वहां कोरबा वेस्ट प्लांट ने उनका जीवन कठिन कर दिया था इसी कोरबा वेस्ट प्लांट को अडानी ने खरीद लिया और अब इसका विस्तार करने जा रहा है यानी प्रदूषण और बढ़ेगा। पहले ही ग्रामीणों की फसलें इस प्लांट के राखड़ और प्रदूषित गैसों की भेंट चढ़ी हुई है, अब इसमें और इजाफा होने वाला है। ज़िम्मेदार मौन हैं, जनप्रतिनिधियों की हवा गुल हो जाती है जब प्लांट खुलने या विस्तार को होता है। सबका कट कंपनी लगा लेती और अपना हिस्सा पाकर क्षणिक लोभ में इमान शांत हो जाता है। जो अंत तक भुगतता है वह है स्थानीय। विकास की अंधी रेस में हमारा रायगढ़ इस कदर भाग रहा है कि उसने न प्रकृति की सोची न जीव-जंतु और मानवों की। मानव सृजित तथाकथित विकास की देन यह है कि अब रायगढ़ में वर्षा नहीं खंड वर्षा होती है। गर्मी के तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जा रहा है। बड़े उद्योगपति और जिम्मेदार प्रतिकूल परिस्थिति में अन्यत्र विस्थापित हो जाते हैं स्थानियों को प्रदूषण के नरक में छोड़ देते हैं। विकास के नाम पर अंततः ठगा जाता है वह स्थल, जिला और वहां की प्रकृति।
विदित हो कि रायगढ़ में उद्योगों की कोई कमी नहीं है! नए उद्योग भी खुल रहे हैं और पुराने उद्योग अपना विस्तार भी कर रहे हैं मगर इसी के साथ प्रदूषण और बेरोजगारी में भी विकराल रूप से विस्तार हो रहा है। यहां सिर्फ उद्योगों का विकास होता है मगर रायगढ़ जिले के रहने वाले स्थानियो का नहीं! जल, जंगल, जमीन का विनाश, बीमारियां, प्रदूषण, बेरोजगारी, विकास के नाम पर यही मिला है। प्रायः शांत रहकर सब कुछ सहने वाले अब इसके विरोध में खड़े हो रहे हैं। ताजा मामला अदानी पावर लिमिटेड का है।
रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखण्ड के लोगों ने इन दिनों अडानी पावर लिमिटेड के खिलाफ अपना मोर्चा खोल दिया है। दरअसल, अडानी कंपनी अपने विस्तार की कवायद में है और आगामी 12 जून को बकायदा इसकी जनसुनवाई भी है। ऐसे में औद्योगिक प्रदूषण, बीमारी और बेरोजगारी की मार से कराह रहे ग्रामीणों के मन में विरोध की चिंगारी सुलगने पर वे लगातार बैठक करते हुए मुखालफत पर उतर आए हैं।
पुसौर ब्लॉक के ग्राम पंचायत बड़े भंडार, छोटे भंडार, अमलीभौना और सरवानी जैसे 4 गांवों के बीच स्थित अडानी पावर लिमिटेड अपने फैक्ट्री का विस्तार करना चाह रहा है। इसकी सरकारी प्रक्रिया भी शुरू हो गई और अगले महीने यानी 12 जुलाई को नजदीकी ग्राम सूपा में विधिवत जनसुनवाई भी मुकर्रर है। यही कारण है कि अडानी के भविष्य में विकराल रूप लेने के पहले जागरूक ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए लड़ाई का श्रीगणेश भी कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कोरबा वेस्ट उनके गांव की हरियाली को पहले ही खा चुकी है। और अब रहा सहा कसर अडानी पावर निकाल रहा है। कंपनी स्थापना के दौरान भूमि अधिग्रहण में स्थानीय लोगों की पुश्तैनी जमीन तो काफी पहले ही जा चुकी है, मगर शर्त के अनुसार उनके परिवार के सदस्यों को न तो स्थायी नौकरी मिली और न ही गोद गांव में सीएसआर मद से विकास की वो गंगा बही, जो नियमानुसार होनी चाहिए। यही नहीं, कंपनी प्रबंधन गांव की कच्ची सडक़ को भी बना नहीं सकी। नतीजतन, बारिश होते ही रोड में पानी और कीचड़ भरा रहता है।
ऐसे में विरोध की मशाल थामे ग्रामीण अब अडानी पावर की जनसुनवाई में जमकर खिलाफत के लिए बैठकें भी कर रहे हैं ताकि अपने गांव के स्वरूप को औद्योगिक प्रदूषण की कालिख से बचा सके।
इसमें ग्रामीणों के साथ सब के साथ रहने की जरूरत है ताकि विस्तार और प्रदूषण को रोका जा सके। प्रदूषण सिर्फ पुसौर के इन 4 गांव तक नहीं रहेगा। इससे पूरा क्षेत्र प्रभावित होगा।


