गांव से ही निकलते है कलाकार…. गरीब परिवार का सपूत बना मूर्तिकार


रायगढ़ :- पुसौर विकासखंड के ग्राम गोर्रा में एक ऐसा बाल कलाकर जो अपने घर में ही देवी देवताओं का मूर्ति बनाकर देता है धार्मिक आस्था को मजबूती प्रदान करने का प्रयास।
हम बात कर रहे है। रायगढ़ के करीब कला संस्कृति के नगरी कहे जाने वाले गांव गोर्रा का जहा एक गरीब परिवार में जन्म लिए बाल मूर्तिकार भावेश महंत पिता बबलू महंत का जिसने साक्षात् देवी देवताओं का मूर्ति बनाकर स्वरूप देता है । जब भी गणेश चतुर्थी हो , नवरात्रि हो या सरस्वती पूजन , विश्वकर्मा पूजन हो अलग अलग देवी देवताओं के पूजन तिथियों में भावेश गांव के ही मिट्टी से मूर्ति को पूर्ण रूप से आकार देता है। मिट्टी से आकार देने के बाद बाजार से रंग खरीद कर अपने अनुभव से ही मूर्ति को रंग से पेंट करके पूर्ण आकार देकर घर में स्वयं स्थापित कर पूजा करता है। भावेश के पिता मकान निर्माण करने वाला एक छोटा सा राजमिस्त्री है। भावेश अपने अनुभव से ही अपनी सोच अनुसार किसी भी मूर्ति को आकार देता है। जब हमने भावेश महंत से जानकारी लिया तो उन्होंने कहा कि पांच वर्ष से पूर्व से मूर्ति बनाते आ रहा हु। उसने कहा कि मेरे मन में अचानक एक जिज्ञासा जागा की मैं भी किसी भी देवी देवताओं का मूर्ति बना सकता हु तब मैंने भगवान को गुरु मानकर मन से ही देवी देवताओं के आकार का अनुभव करके बनाना प्रारंभ किया। भावेश ने कहा कि प्रारंभ में मैंने साई बाबा का मूर्ति बनाया । फिर कृष्ण , गणेश, दुर्गा मूर्ति भी बनाया और स्वयं स्थापना कर पूजा किया। भावेश को शासन या किसी से भी कोई सहयोग नहीं मिलता है। अगर ऐसे हुनर बाज कलाकारो को शासन से सहयोग मिलता है तो हमारे जिला और क्षेत्र में ही अच्छे अच्छे मुर्तिकार बन जायेंगे जिससे लोगो को रोजागार भी मिल सकता है।
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