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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस: एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प का प्रतीक

रायगढ़, 23 जून।
“देश में दो संविधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे…”—यह बुलंद नारा देने वाले महान राष्ट्रभक्त, भारतीय जनसंघ के संस्थापक, शिक्षाविद, चिंतक और विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की आज बलिदान दिवस पर देश उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

डॉ. मुखर्जी ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित किया। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35A हटाने के लिए उन्होंने वर्ष 1953 में बिना परमिट के ही कश्मीर जाने का साहसिक निर्णय लिया। वहां पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 23 जून 1953 को रहस्यमयी परिस्थितियों में जेल में उनका निधन हो गया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।

उनकी शहादत से देश में एक नई चेतना का संचार हुआ और तत्कालीक सरकार को जम्मू-कश्मीर में लागू परमिट सिस्टम को हटाना पड़ा। उनका सपना था एक राष्ट्र, एक संविधान और एक विधान—जो आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने के ऐतिहासिक निर्णय से साकार हुआ है।

आज के दिन राष्ट्र उन्हें शत-शत नमन करते हुए उनके बलिदान को स्मरण करता है। साथ ही देश के वर्तमान नेतृत्व को, जिन्होंने डॉ. मुखर्जी के अधूरे स्वप्न को साकार किया, कोटि-कोटि शुभकामनाएं और अभिनंदन प्रेषित करता है।

Editor Hemsagar shrivas

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