
📍पुसौर, 30 जून 2025:
भारतीय इतिहास में 1975 का आपातकाल एक ऐसा काला अध्याय है, जिसे आज भी लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के सबसे बड़े हनन के रूप में याद किया जाता है। भारतीय जनता पार्टी मंडल पुसौर के अध्यक्ष श्री जैमिनी गुप्ता ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि “आपातकाल कांग्रेस के घिनौने चेहरे को उजागर करता है, जिसमें सत्ता के लिए संविधान और लोकतंत्र की खुलेआम हत्या की गई।”

🔴 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा ‘आंतरिक अशांति’ का हवाला देकर पूरे देश में अघोषित तानाशाही थोप दी गई। इस दौरान अनेक ऐसे कदम उठाए गए जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को हिला दिया:
✅ नागरिक अधिकारों का हनन:
मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। प्रेस, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पूर्ण रोक लगा दी गई।
✅ राजनीतिक विरोधियों की गिरफ्तारी:
जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई और जॉर्ज फर्नांडीस जैसे हजारों विपक्षी नेताओं को बिना मुकदमा जेल में बंद कर दिया गया।
✅ प्रेस पर सेंसरशिप:
प्रकाशन से पहले सरकारी अनुमति अनिवार्य कर दी गई थी। प्रेस को बंधक बना लिया गया था।
✅ न्यायपालिका की ताकत में कटौती:
सरकार के फैसलों पर न्यायपालिका अंकुश न लगा सके, इसके लिए संविधान में संशोधन कर न्यायपालिका को कमजोर किया गया।
✅ जबरन नसबंदी अभियान:
संजय गांधी के निर्देश पर जबरन नसबंदी कराई गई, जिससे आमजन में भारी असंतोष फैला।
✅ असंवैधानिक सत्ता केंद्र का उदय:
बिना किसी पद या जवाबदेही के संजय गांधी जैसे लोग देश चला रहे थे।
🗣 जैमिनी गुप्ता ने कहा कि “1977 में जनता ने अपने मत से जवाब दिया और कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया। यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत थी।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी आज भी उस लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जिसकी हत्या 1975 में कांग्रेस ने की थी।



