अडानी पावर पर वादाखिलाफी का आरोप: जमीन के बदले नौकरी दी, डेढ़ साल बाद निकाला; ग्रामीणों का बेमियादी धरना शुरू सांसद की सिफारिश को भी किया नजरअंदाज

रायगढ़ :-
विवादों में घिरी अडानी पावर लिमिटेड एक बार फिर आरोपों के घेरे में है। ग्राम बड़े भंडार के एक शिक्षित युवक ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने पुश्तैनी जमीन अधिग्रहण के बदले में उसे वर्कमैन ग्रेड टी-3 की नौकरी दी, लेकिन डेढ़ साल बाद बिना नोटिस के उसे काम से निकाल दिया गया। इस कथित अन्याय के खिलाफ ग्रामीणों ने अब कंपनी के गेट के सामने बेमियादी धरना शुरू कर दिया है।
रायगढ़-सारंगढ़ नेशनल हाईवे के किनारे स्थित अडानी पावर कंपनी इस बार पत्रकारों और ग्रामीणों दोनों के निशाने पर है। बीते 6 अगस्त को जिला कलेक्ट्रेट परिसर में अडानी के कर्मचारियों द्वारा पत्रकारों को “गुंडा” कहने और बदसलूकी करने की घटना से रायगढ़ प्रेस क्लब ने कड़ा विरोध जताते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया है। इसी बीच, ग्रामीणों के आरोपों ने कंपनी के रवैये पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीन गई, नौकरी भी गई
गांव के चिंतामणि प्रधान, पिता विभीषण प्रधान, का कहना है कि कोरबा वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के आगमन पर उनकी लगभग 45 डिसमिल पुश्तैनी जमीन का अधिग्रहण किया गया था। बदले में कंपनी ने उन्हें वर्कमैन के रूप में नौकरी दी। लेकिन जनसुनवाई-2 के दौरान बिना किसी कारण या विधिवत नोटिस के उन्हें हटा दिया गया।
अब कंपनी प्रबंधन उन्हें 5 लाख रुपये देकर ठेकेदार के तहत काम करने का प्रस्ताव दे रही है, जिसे उन्होंने सिरे से नकार दिया। चिंतामणि का आरोप है कि कंपनी ने कई और स्थानीय युवाओं को इसी तरह शोषण का शिकार बनाया है।
*अनिश्चितकालीन धरना और धमकी*
चिंतामणि के साथ गांव के अन्य पीड़ित भी 2 अगस्त से कंपनी गेट के सामने दरी बिछाकर परिवार सहित धरने पर बैठ गए हैं। आरोप है कि धरने के दौरान जब प्रदर्शनकारी बैनर लगाते हैं, तो अडानी के सुरक्षा कर्मी उन्हें धमकाते हैं और धरना खत्म करने के लिए दबाव बनाते हैं।
*शिकायतें बेअसर, प्रशासन मौन*
पीड़ित चिंतामणि प्रधान ने बताया कि उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में तीन बार शिकायत की है, लेकिन सभी मामलों को उद्योग विभाग में भेजकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कार्रवाई न होने से हताश ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और स्पष्ट किया है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, धरना खत्म नहीं होगा।
*सांसद की सिफारिश भी हुई दरकिनार*
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रायगढ़ के सांसद राधेश्याम राठिया ने अडानी पावर के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर चिंतामणि की पुनर्बहाली की अनुशंसा की थी। लेकिन कंपनी प्रबंधन ने सांसद की सिफारिश को भी दरकिनार करते हुए मानो यह स्पष्ट कर दिया कि वे न जनप्रतिनिधियों की परवाह करते हैं, न न्याय की।



