
रायगढ़ :- राजनीति के अखाड़े में कई बार रिश्तों और बलिदान की अनदेखी होती आई है। खरसिया क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है—जहाँ राजनीति में आकर शहादत देने वाले नेता की धर्मपत्नी को आज तक ‘गद्दी’ नहीं मिली।
लोगों का आरोप है कि राजनीति के चक्कर में “लाल” ने यह गद्दी अपने पास रख ली, और असली हक़दार को दरकिनार कर दिया।
सवाल उठता है—जब दूसरों को नसीहत दी जाती है, तो पहले ख़ुद क्यों नहीं मिसाल पेश करते?
लाल! पहले तुम गद्दी छोड़ो और उस शख़्स को उसका हक़ दो, जिसने बलिदान दिया है।



