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जिला कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में ‘त्रिलोक श्रीवास’ का एकतरफा माहौल बेलतरा से बिलासपुर तक उमड़ा समर्थन सैलाब !

बिलासपुर, 12 अक्टूबर 2025।
बिलासपुर जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) अध्यक्ष पद की दौड़ अब लगभग एकतरफा होती दिख रही है। पार्टी के वरिष्ठ, सक्रिय और जुझारू नेता त्रिलोक श्रीवास के पक्ष में रविवार को बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में हजारों कांग्रेसजन, पंचायत प्रतिनिधि, समाज प्रमुख और संगठन पदाधिकारी एकजुट हो गए।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक एवं मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार के सामने करीब दो हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने त्रिलोक श्रीवास के नाम पर अपनी सहमति जताई। सभा स्थल “त्रिलोक श्रीवास जिंदाबाद” और “युवा नेतृत्व हमारा अभिमान” जैसे नारों से गूंज उठा।
बेलतरा में आयोजित इस बैठक में कांग्रेस के पुराने और नए दोनों धड़ों के कार्यकर्ता एक साथ नजर आए।कार्यक्रम में जनपद सदस्य, सरपंच, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक कांग्रेस पदाधिकारी और सामाजिक संगठन प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
सभी ने एकमत होकर कहा कि —
“त्रिलोक श्रीवास पिछले तीन दशक से लगातार सक्रिय हैं, हर वर्ग और समाज में उनकी मजबूत पकड़ है, ऐसे में ग्रामीण कांग्रेस का नेतृत्व उन्हें ही सौंपा जाना चाहिए।”पर्यवेक्षक उमंग सिंघार ने बिलासपुर शहर में भी सैकड़ों कार्यकर्ताओं से अलग-अलग मुलाकात की। दिलचस्प बात यह रही कि शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद के साथ-साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने ग्रामीण अध्यक्ष पद के लिए भी त्रिलोक श्रीवास का नाम प्रमुखता से आगे रखा। बिल्हा और मस्तूरी विधानसभा क्षेत्रों से भी सैकड़ों कांग्रेसजन उमंग सिंघार से मिले और त्रिलोक श्रीवास को सर्वसम्मति से समर्थन दिया। त्रिलोक श्रीवास का राजनीतिक जीवन तीन दशक से अधिक पुराना है। उन्होंने पार्टी संगठन में अनेक जिम्मेदारियां निभाईं हैं और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहे हैं। वे न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य राज्यों में भी पार्टी के अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

उनकी छवि युवा, सशक्त और जुझारू कार्यकर्ता की है, जो हर जाति–वर्ग में लोकप्रिय हैं।
जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष पद की दौड़ में अब यह स्पष्ट है कि त्रिलोक श्रीवास को जमीनी स्तर से जबरदस्त समर्थन मिल चुका है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार —
“अन्य दावेदारों की तुलना में श्रीवास न केवल संख्या में बल्कि जनसमर्थन और संगठनात्मक अनुभव दोनों में काफी आगे निकल चुके हैं।”

Editor Hemsagar shrivas

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