
रायगढ़। जनपद पंचायत पुसौर क्षेत्र में रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि इन योजनाओं की विस्तृत जानकारी जनसूचना के रूप में कभी भी सार्वजनिक नहीं की जाती। न तो अधिकारियों की ओर से यह बताया जाता है कि कितने लोगों को यात्रा पर भेजा जा रहा है, और न ही आवेदन की प्रक्रिया स्पष्ट की जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के लिए आवेदन करना चाहता है, तो उसे पहले क्षेत्र के भाजपा प्रमुख नेता या उनके प्रतिनिधियों से “अनुमति” प्राप्त करनी पड़ती है। उसके बाद ही अधिकारी आवेदन स्वीकार करते हैं। यानी तीर्थ योजना में शामिल होने के लिए राजनीतिक सिफारिश अनिवार्य सी हो गई है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि धार्मिक आस्था रखने वाले गरीब या सामान्य वर्ग के बुजुर्ग नागरिक जिनकी श्रद्धा ही इस योजना की आत्मा है। आखिर कैसे शामिल हो पाएंगे?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति केवल जनपद पंचायत पुसौर तक सीमित है या अन्य ब्लॉकों में भी ऐसा ही चल रहा है, इसकी जांच आवश्यक है।
कुल मिलाकर, यह उदाहरण बताता है कि जब प्रशासनिक निर्णय राजनीतिक दबाव के अधीन हो जाते हैं, तब योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुँच पाता।



