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जीएडी कॉलोनी पुसौर में शासकीय आवासों पर कब्जा बरकरार, विभाग चुप—जरूरतमंद कर्मचारी परेशान! जरा इधर भी संज्ञान लीजिए एस डी एम साहब!

पुसौर। जनपद मुख्यालय पुसौर स्थित जीएडी कॉलोनी इन दिनों चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। कारण है—यहां के शासकीय आवासों पर स्थानांतरित एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों का लगातार बना हुआ कब्जा। विभाग द्वारा इन्हें आवास खाली कराने या बाजार दर पर किराया वसूलने की कोई ठोस कार्यवाही न किए जाने से कई सक्रिय एवं जरूरतमंद कर्मचारियों को आवास उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, कॉलोनी के अधिकांश आवास ऐसे कर्मचारियों के कब्जे में हैं, जो या तो अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं या फिर सेवानिवृत्ति के बाद भी मकान खाली नहीं कर रहे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की इस कॉलोनी में आवासों का मूल उद्देश्य सक्रिय कर्मचारियों को निवास सुविधा प्रदान करना है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी में राजस्व विभाग का “दबदबा” बना हुआ है, जिसके कारण कार्रवाई ठप पड़ी रहती है। बताया जा रहा है कि कई शिकायतों के बावजूद न तो नोटिस जारी किया गया और न ही सरकारी नियमों के अनुसार बकाया किराया वसूला जा रहा है। नियमों के तहत आवास खाली न करने पर बाजार दर से किराया वसूलना अनिवार्य है, मगर यहां यह प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित प्रतीत होती है।

जरूरतमंद कर्मचारियों ने यह भी बताया कि वे वर्षों से आवास के लिए आवेदन कर रहे हैं, परंतु आवास उपलब्ध न होने की वजह से उन्हें निजी मकानों में महंगा किराया देकर रहना पड़ रहा है। इससे विभाग की आवास प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जीएडी कॉलोनी की स्थिति यह दर्शाती है कि यदि विभाग तत्काल कार्रवाई नहीं करता, तो कर्मचारी आवास संकट और गहरा सकता है। नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर कब्जा हटाए, बकाया किराया वसूले और पात्र कर्मचारियों को तुरंत आवास उपलब्ध कराए।

Editor Hemsagar shrivas

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