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खरसिया विधानसभा में भाजपा अगर कांग्रेस का छाया कार्यकर्ता न बने तो भाजपा का विधायक तय!

रायगढ़ :-खरसिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति इन दिनों एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। चुनावी सरगर्मी के बीच यह सवाल आम कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच गूंज रहा है कि आखिर भाजपा बार-बार मजबूत स्थिति के बावजूद जीत से क्यों चूक जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों और जमीनी कार्यकर्ताओं की मानें तो इसका सबसे बड़ा कारण पार्टी के भीतर मौजूद वे चेहरे हैं, जो दिखने में तो भाजपा के हैं, लेकिन व्यवहार और रणनीति में कांग्रेस के छाया कार्यकर्ता की भूमिका निभाते हैं।
चुनाव के समय ऐसे नेता और पदाधिकारी सक्रिय हो जाते हैं, जो संगठन से ज्यादा अपने निजी हित, गुटबाजी और सौदेबाजी को प्राथमिकता देते हैं। परिणामस्वरूप समर्पित कार्यकर्ता हतोत्साहित होते हैं और पार्टी की जमीनी पकड़ कमजोर पड़ जाती है। खरसिया में भाजपा का परंपरागत वोट बैंक, राष्ट्रवादी सोच और मजबूत संगठनात्मक ढांचा मौजूद है, लेकिन जब अपने ही लोग चुनावी शतरंज में ‘जयचंद’ बनकर एक चाल छोड़ देते हैं, तो जीत हाथ से निकल जाती है।
भाजपा कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व समय रहते ऐसे छाया कार्यकर्ताओं की पहचान कर उन्हें किनारे करे और वास्तविक, निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाए, तो खरसिया में भाजपा की जीत तय है। जनता अब चेहरे नहीं, बल्कि स्पष्ट विचारधारा, ईमानदार नेतृत्व और जमीनी काम चाहती है। केवल बड़े नेताओं के नाम या मंचीय भाषणों से चुनाव नहीं जीते जा सकते।
खरसिया की जनता विकास, सुशासन और पारदर्शिता को महत्व देती है। भाजपा के पास केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों की मजबूत पूंजी है, लेकिन उसका सही लाभ तभी मिलेगा जब संगठन एकजुट होकर कांग्रेस की रणनीतियों को दोहराने की बजाय अपनी पहचान के साथ चुनाव लड़े। यदि भाजपा कांग्रेस का छाया कार्यकर्ता बनने की मानसिकता छोड़ दे और कार्यकर्ता-आधारित राजनीति को अपनाए, तो आने वाले विधानसभा चुनाव में खरसिया से भाजपा विधायक बनना कोई मुश्किल काम नहीं होगा।

Editor Hemsagar shrivas

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