पुसौर ब्लॉक के गांव-गांव में चल रहा राशन कार्ड गिरवी रखने का खेल, जिम्मेदार अधिकारी साधे बैठे हैं चुप्पी!

रायगढ़ :- पुसौर विकासखंड के अधिकांश गांवों में गरीबों के हक पर डाका डालने का एक गंभीर और शर्मनाक खेल खुलेआम चल रहा है। यहां जरूरतमंद हितग्राहियों से कर्ज के बदले उनका राशन कार्ड गिरवी रखवाया जा रहा है। साहूकार और कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग गरीब परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर न सिर्फ उनका राशन हड़प रहे हैं, बल्कि उस पर 5 से 10 प्रतिशत तक का ब्याज भी वसूल रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जिन परिवारों के पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं है, वे छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उधार लेने को मजबूर हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर साहूकार हितग्राही से राशन कार्ड अपने पास रख लेते हैं और पूरे माह का सरकारी चावल खुद उठा लेते हैं। परिणामस्वरूप गरीब परिवार, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग, दो वक्त के भोजन के लिए तरसने को मजबूर हो जाते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल में कुछ राशन विक्रेताओं की मिलीभगत की भी चर्चा आम है। आरोप है कि बिना राशन कार्ड हितग्राही के पास हुए भी चावल का वितरण कर दिया जाता है, जिससे यह साफ होता है कि इस अवैध कृत्य को अंदरूनी संरक्षण प्राप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इस मामले की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई, लेकिन न तो जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई। खाद्य विभाग, पंचायत और प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर सामाजिक अपराध पर चुप्पी साधे बैठे हैं। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।
राशन कार्ड गरीबों की जीवनरेखा है। उसे गिरवी बनाकर मुनाफाखोरी करना न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि मानवता पर भी सवाल खड़ा करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन कब इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई करता है, या फिर गरीबों का हक इसी तरह लुटता रहेगा।



