ग्रामीण एकजुटता की जीत, जनसुनवाई रद्द होते ही तमनार में धरना स्थगित!


जिला प्रशासन और जिंदल पावर लिमिटेड के बीच बने हालात के बाद तमनार क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपना धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया है। जनसुनवाई निरस्त किए जाने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों में संतोष और उत्साह का माहौल है। ग्रामीण इसे अपनी एकजुटता और संघर्ष की जीत मान रहे हैं।
दरअसल, जिंदल पावर लिमिटेड द्वारा गारे पेल्मा सेक्टर-1 कोयला खदान परियोजना से जुड़ी जनसुनवाई का प्रस्ताव रखा गया था। यह जनसुनवाई 8 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित थी, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने परियोजना के पर्यावरणीय, सामाजिक और आजीविका से जुड़े संभावित दुष्प्रभावों को लेकर विरोध शुरू कर दिया। विरोध इतना व्यापक हुआ कि ग्रामीणों ने लगातार 18 दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया और जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग पर अड़े रहे।
धरना-प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। इसी बीच 27 दिसंबर 2025 को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एक हिंसक घटना सामने आई। इस घटना में धरना रत ग्रामीणों के ऊपर लाठी चार्ज हुआ जिसमें कई ग्रामीणों गंभीर रूप से घायल हो गए साथ ही पुलिसकर्मियों और कंपनी के कर्मचारियों को भी चोटिल होना पड़ा । इसके साथ ही कोल हैंडलिंग प्लांट में आगजनी की घटना भी हुई, जिससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस घटना के बाद प्रशासन और कंपनी दोनों की चिंता बढ़ गई।
हालात की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ कलेक्टर ने 28 दिसंबर 2025 को गारे पेल्मा सेक्टर-1 कोयला खदान से संबंधित जनसुनवाई को निरस्त करने का पत्र जारी किया। प्रशासन के इस निर्णय को ग्रामीणों ने अपनी मांगों की जीत के रूप में देखा। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि फिलहाल जनसुनवाई नहीं कराई जाएगी और शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
इसी क्रम में जिंदल पावर लिमिटेड ने भी आधिकारिक रूप से जनसुनवाई का आवेदन वापस लेने की जानकारी दी। कंपनी की ओर से स्पष्ट किया गया कि जब तक स्थानीय ग्रामीणों का समर्थन नहीं मिलता, तब तक इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा कि भविष्य में परिस्थितियां अनुकूल होने और ग्रामीणों की सहमति मिलने पर ही पुनः आवेदन पर विचार किया जाएगा।
जनसुनवाई निरस्त होने और आवेदन वापस लिए जाने के बाद तमनार क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपना धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह संघर्ष उनके अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए था। आंदोलन में शामिल लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने की अपील की गई है, वहीं ग्रामीणों ने भी कहा है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी भी परियोजना से पहले उनकी सहमति और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया है कि संगठित और जागरूक जनआंदोलन प्रशासन और बड़ी कंपनियों के फैसलों को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं।



