पुसौर ब्लॉक की धान मंडियों में खुला भ्रष्टाचार, किसानों की मेहनत पर खुली लूट!

पुसौर ब्लॉक की अधिकांश धान खरीदी मंडियों में माप-तौल नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। किसानों से तय मानक से अधिक धान तौल किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आँख मूँदे बैठे हैं। यह कोई छुपा हुआ खेल नहीं, बल्कि खुले मंच पर चल रहा भ्रष्टाचार है, जिसमें मंडी प्रबंधन से लेकर नोडल अधिकारी तक की भूमिका सवालों के घेरे में है।
किसान दिन-रात मेहनत कर अपनी फसल मंडी तक लाते हैं, लेकिन मजबूरी और भय के कारण वे ज्यादा तौल के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा पा रहे हैं। उन्हें डर है कि यदि विरोध किया तो उनकी उपज की खरीदी में बाधा डाली जाएगी। इसी डर का फायदा उठाकर मंडियों में भ्रष्टाचार “बल्ले-बल्ले” कर रहा है। प्रति बोरी कुछ किलो ज्यादा तौलना अब सामान्य बात बन चुकी है, जिससे सीधे-सीधे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आला अधिकारी या जांच दल मंडी में पहुंचते हैं, तो उनकी जांच मीडिया के सामने क्यों नहीं होती? क्या वजह है कि हर बार जांच बंद कमरे में होती है? कहीं ऐसा तो नहीं कि मीडिया की मौजूदगी से “कमीशन सेटिंग” बिगड़ जाने का डर रहता हो? यदि सब कुछ नियम के अनुसार है, तो पारदर्शिता से क्यों बचा जा रहा है?
सूत्रों की मानें तो यदि पुसौर ब्लॉक की मंडियों का एक साथ, एक ही लाइन में भौतिक सत्यापन करा दिया जाए, तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों का पिटारा खुल जाएगा। तौल कांटे, रजिस्टर, खरीदी पर्ची और वास्तविक वजन—सबका अंतर सामने आ जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और खाद्य विभाग इतनी हिम्मत दिखाएगा?
अब समय आ गया है कि इस लूट पर तत्काल रोक लगे। स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो, और किसानों को भयमुक्त वातावरण मिले। वरना पुसौर ब्लॉक की मंडियां किसानों के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की सुरक्षित पनाहगाह बनकर रह जाएंगी।



