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एसडीएम दफ्तर में खुलेआम घूस का खेल: बाबू पकड़ा गया, संरक्षण देने वाले बेनकाब कब?

रायगढ़ :-धरमजयगढ़ में एसडीएम कार्यालय के एक बाबू को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा जाना महज़ एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र में गहराई तक जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार का खुला पर्दाफाश है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की इस कार्रवाई ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। लेकिन असली सवाल अब और भी गंभीर हो गया है—क्या सिर्फ बाबू ही दोषी है, या वह किसी बड़े खेल का मोहरा मात्र है?
एसीबी के हत्थे चढ़ा आरोपी अनिल कुमार चेलक, जो एसडीएम कार्यालय में बाबू के पद पर पदस्थ है, एक लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि यह रिश्वत किसी प्रशासनिक कार्य को आगे बढ़ाने या लाभ पहुंचाने के एवज में मांगी गई थी। सवाल यह उठता है कि क्या बिना ऊपर के संरक्षण के एक बाबू इतनी बेखौफ होकर रिश्वतखोरी कर सकता है?
सूत्रों के अनुसार, एसडीएम कार्यालय में लंबे समय से “लेन-देन” का एक सिस्टम चल रहा था, जिसमें फाइलें तभी सरकती थीं जब जेबें गर्म होती थीं। आम नागरिकों और ग्रामीणों में यह चर्चा आम थी कि बिना “चढ़ावे” के काम होना नामुमकिन है। ऐसे में अनिल कुमार चेलक की गिरफ्तारी उस पूरे सिस्टम की ओर इशारा करती है, जो अब तक पर्दे के पीछे सुरक्षित बना हुआ था।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बाबू की गिरफ्तारी के बाद भी उच्च अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या इस मामले की जांच सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित रह जाएगी? या फिर एसीबी उन अधिकारियों तक भी पहुंचेगी, जिनके इशारे पर यह पूरा खेल चल रहा था?
जनता अब सिर्फ गिरफ्तारी से संतुष्ट नहीं है। धरमजयगढ़ की जनता जानना चाहती है कि इस रिश्वतखोरी का मास्टरमाइंड कौन है। अगर निष्पक्ष और गहन जांच नहीं हुई, तो यह कार्रवाई भी सिर्फ एक दिखावटी कदम बनकर रह जाएगी। अब वक्त है कि प्रशासन खुद को कटघरे में खड़ा करे, वरना “भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई” सिर्फ कागजी नारा बनकर रह जाएगी।

Editor Hemsagar shrivas

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