
रायगढ़ :-पिछली सरकार के कार्यकाल में काले हीरे यानी कोयला तस्करी का ऐसा संगठित खेल सामने आया था, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति और प्रशासन को हिला कर रख दिया। कोयला घोटाले में प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली के आरोपों ने पूर्व मुख्यमंत्री के उप सचिव सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी, सुनील अग्रवाल, एस.एस. नाग और पूर्व कलेक्टर रानू साहू को 12 महीने से अधिक समय तक जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। जांच एजेंसियों के अनुसार उस समय करीब 2000 करोड़ रुपये के घोटाले की परतें खुली थीं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी जस का तस खड़ा है—सरकार बदलने के बाद भी काले हीरे की तस्करी आखिर क्यों नहीं थमी? सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, वह और भी चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि एसईसीएल (SECL) के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों ने फिर से एक मजबूत सिंडीकेट खड़ा कर लिया है, जहां अब प्रति टन 80 रुपये तक की अवैध वसूली की चर्चा जोरों पर है।
सूत्रों का दावा है कि खदान से लेकर परिवहन और डिस्पैच तक एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसकी जड़ें गहरी होती जा रही हैं। अगर समय रहते इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह “जखीरा घोटाला” आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।
अब देखना यह है कि क्या नई सत्ता व्यवस्था सच में काले हीरे की तस्करी पर सख्त प्रहार करेगी, या फिर यह खेल यूँ ही चलता रहेगा।



