जनपद पंचायत पुसौर की NRLM–बिहान शाखा पर घोटाले का साया, रजिस्टर खुलते ही लाखों की बंदरबांट उजागर होने की आशंका?*

*रायगढ़ :-जनपद पंचायत पुसौर अंतर्गत संचालित NRLM योजना (बिहान शाखा) में गंभीर* *अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। यदि योजना से जुड़े रजिस्टरों और अभिलेखों की गहन व निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो लाखों रुपये के घोटाले का खुलासा होना तय माना जा रहा है। आरोप है कि स्वसहायता समूहों के नाम पर* *सीआईएफ (Community Investment Fundजनपद पंचायत पुसौर की NRLM–बिहान शाखा पर घोटाले का साया, रजिस्टर खुलते ही लाखों की बंदरबांट उजागर होने की आशंका*
*जनपद पंचायत पुसौर अंतर्गत संचालित NRLM योजना (बिहान शाखा) में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। यदि योजना से जुड़े रजिस्टरों और अभिलेखों की गहन व निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो* *लाखों रुपये के घोटाले का खुलासा होना तय माना जा रहा है। आरोप है कि स्वसहायता समूहों के नाम पर सीआईएफ की भारी-भरकम राशि नियमों को ताक पर रखकर निकाल ली गई।*
*NRLM के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी स्वसहायता समूह को कम से कम छह माह तक सक्रिय रहकर महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों में भागीदारी करनी होती है। इसके बाद ही समूह को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सीआईएफ राशि का* *वितरण किया जाता है। लेकिन पुसौर में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए नवगठित, निष्क्रिय अथवा कागजी समूहों के नाम पर भी लोन और सीआईएफ राशि निकालने के* *आरोप लग रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित बंदरबांट का रूप ले चुकी है।*
*स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि जनपद पुसौर के प्रत्येक ग्राम में संचालित स्वसहायता समूहों का सघन निरीक्षण कराया जाए। सक्रिय और निष्क्रिय समूहों की स्पष्ट पहचान कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो। इससे न केवल अनियमितताओं पर रोक लगेगी, बल्कि वास्तव में सक्रिय समूहों को** महिला सशक्तिकरण के लिए आगे बढ़ने का हौसला भी मिलेगा।
प्रशासन से मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए*, *रजिस्टरों का ऑडिट हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और गलत तरीके से वितरित राशि की वसूली* *सुनिश्चित की जाए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह योजना—जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है—भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती चली जाएगी।) की भारी-भरकम राशि नियमों को ताक पर रखकर निकाल ली गई।
*NRLM के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी स्वसहायता समूह को कम से कम छह माह तक सक्रिय रहकर महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों में भागीदारी करनी होती है। इसके बाद ही समूह को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सीआईएफ राशि का* वितरण किया जाता है। लेकिन पुसौर में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए नवगठित, निष्क्रिय अथवा कागजी समूहों के नाम पर भी लोन और *सीआईएफ राशि निकालने के आरोप लग रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित बंदरबांट का रूप ले चुकी है।*
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि जनपद पुसौर के प्रत्येक ग्राम में संचालित स्वसहायता समूहों का सघन निरीक्षण कराया जाए। सक्रिय और निष्क्रिय समूहों की स्पष्ट पहचान कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो। इससे न केवल अनियमितताओं पर रोक लगेगी, बल्कि वास्तव में सक्रिय समूहों को महिला सशक्तिकरण के लिए आगे बढ़ने का हौसला भी मिलेगा।
प्रशासन से मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, रजिस्टरों का ऑडिट हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और गलत तरीके से वितरित राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह योजना—जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है—भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती चली जाएगी।



