जनता के सवाल न्यूज़ खबर का दिखा असर, आखिरकार NRLM बिहान पुसौर की क्षेत्रीय समन्वयक हटाई गई!

रायगढ़ /पुसौर :- जनता के सवाल न्यूज़ द्वारा लगातार प्रकाशित की जा रही खबरों का असर अब साफ़ तौर पर ज़मीन पर दिखाई देने लगा है। जनपद पंचायत पुसौर अंतर्गत एनआरएलएम बिहान योजना में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं, अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही और सीएलएफ (CLF) राशि की कथित बंदरबांट को लेकर उठाए गए सवालों के बाद आखिरकार प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा है। जिला पंचायत सीईओ रायगढ़ ने पुसौर में पदस्थ क्षेत्रीय समन्वयक को वहां से हटाते हुए रायगढ़ स्थानांतरित कर दिया है।

गौरतलब है कि एनआरएलएम बिहान योजना के तहत पुसौर क्षेत्र में लंबे समय से गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ रही थीं। समूहों के नाम पर जारी राशि, सीआईएफ फंड के उपयोग और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई, तो जनपद पंचायत पुसौर के सीईओ और बिहान योजना के अधिकारियों ने जानकारी देने से साफ़ इनकार कर दिया। न तो समयसीमा के भीतर जवाब दिया गया और न ही कोई ठोस दस्तावेज़ उपलब्ध कराए गए।
जनता के सवाल न्यूज़ मे इस पूरे मामले को गंभीरता से उठाते हुए लगातार खबरें प्रकाशित कीं। विशेष रूप से दिनांक 15 जनवरी को फ्रंट पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित खबर में यह उजागर किया गया था कि किस तरह जनसूचना अधिकार कानून को ठेंगा दिखाया जा रहा है और कैसे भ्रष्टाचार की आशंका वाली जानकारी जानबूझकर दबाई जा रही है। खबरों के दबाव और जनहित के सवालों के बीच आखिरकार जिला पंचायत सीईओ रायगढ़ को हस्तक्षेप करना पड़ा। परिणामस्वरूप जनपद पंचायत पुसौर में पदस्थ क्षेत्रीय समन्वयक का स्थानांतरण जनपद पंचायत रायगढ़ कर दिया गया। यह कार्रवाई कहीं न कहीं इस बात की पुष्टि करती है कि खबरों में उठाए गए सवाल निराधार नहीं थे।
हालांकि, अब भी कई सवाल जस के तस बने हुए हैं। क्या यह स्थानांतरण मात्र औपचारिकता है या इसके बाद ठोस जांच भी होगी? क्या क्षेत्रीय समन्वयक को वास्तव में पुसौर से समय पर रिलीव किया जाएगा, या फाइलों में ही कार्रवाई सिमट कर रह जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल—बिहान योजना में जिस सीएलएफ राशि की बंदरबांट की बात सामने आ रही है, उसकी जवाबदेही किन अधिकारियों पर तय होगी?
जनता यह भी जानना चाहती है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी आखिर कब उपलब्ध कराई जाएगी। क्या जनपद पंचायत पुसौर के सीईओ और संबंधित अधिकारी अब भी चुप्पी साधे रहेंगे, या कानून के अनुसार जवाब देना जरूरी समझेंगे?
फिलहाल, इतना तो तय है कि रायगढ़ अंचल समाचार पत्र की निर्भीक पत्रकारिता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सशक्त खबरें सत्ता और सिस्टम को झुकने पर मजबूर कर सकती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है या फिर पूरे भ्रष्टाचार के खेल पर से परदा उठाने की दिशा में एक ठोस कदम।



