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क़ानून रसूखदारों के लिए या मजलूमों के लिए? होटल ट्रिनिटी रेड में सबसे बड़ा सवाल अनुत्तरित — स्पा संचालक गिरफ्तार, लेकिन होटल मालिक पूरी तरह सुरक्षित क्यों?


रायगढ़।
होटल ट्रिनिटी की सातवीं मंज़िल पर संचालित सनराइज स्पा एंड सैलून में देह व्यापार के भंडाफोड़ के बाद रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई अब खुद संदेह के घेरे में है। पुलिस की अपनी प्रेस विज्ञप्ति यह स्वीकार करती है कि होटल परिसर के भीतर अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं, ग्राहकों को लड़कियां उपलब्ध कराई जा रही थीं और पूरा नेटवर्क होटल के अंदर सक्रिय था। इसके बावजूद अब तक होटल ट्रिनिटी के मालिक या संचालक पर कोई अपराध दर्ज न होना, कानून की निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
पुलिस जब खुद मान रही है कि अवैध धंधा होटल के भीतर चल रहा था, तो यह मान लेना मुश्किल है कि होटल प्रबंधन इससे अनजान था। सवाल साफ है—क्या होटल संचालक की जानकारी और सहमति के बिना सातवीं मंज़िल पर इस स्तर का देह व्यापार संभव है? और यदि नहीं, तो फिर कार्रवाई सिर्फ स्पा संचालक और मैनेजर तक सीमित क्यों रखी गई?
छोटों पर सख्ती, बड़ों पर नरमी — दोहरा मापदंड क्यों?

रायगढ़ में यह कोई पहला मामला नहीं है, जब छोटे कथित मामलों में पुलिस मकान मालिक, दलाल, यहां तक कि आसपास के लोगों को भी आरोपी बना देती है। लेकिन जैसे ही मामला एक “प्रतिष्ठित” और रसूखदार होटल से जुड़ता है, कानून की धार अचानक कुंद हो जाती है। क्या कानून केवल कमजोर ठिकानों पर ही पूरी ताकत से चलता है?
राजनीतिक दबाव या अंदरूनी सेटिंग?
शहर में यह चर्चा अब दबे स्वर में नहीं, बल्कि खुलकर हो रही है कि होटल ट्रिनिटी के संचालक को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। यही वजह बताई जा रही है कि रेड के बाद घंटों तक पुलिस चुप रही और जब प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, तो उसमें होटल मालिक की भूमिका पर एक शब्द तक नहीं लिखा गया। यह चुप्पी खुद बहुत कुछ कहती है।
सूत्रों के अनुसार होटल ट्रिनिटी लंबे समय से पुलिस और प्रशासन का “पसंदीदा ठिकाना” माना जाता रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इसी नजदीकी ने कानून के हाथ बांध दिए?
पुलिस की चुप्पी, सवालों की लंबी कतार
पुलिस यह स्पष्ट क्यों नहीं कर रही कि होटल मालिक या संचालक की भूमिका की जांच हो रही है या नहीं।
अगर जांच हो रही है, तो उसका सार्वजनिक उल्लेख क्यों नहीं?
और अगर जांच ही नहीं हो रही, तो यह सीधे तौर पर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल है।
पुलिस के दावे बनाम अधूरी कार्रवाई
पुलिस कहती है—अवैध गतिविधि होटल के अंदर चल रही थी।
हकीकत यह है—होटल संचालक पर कोई केस नहीं।
यह विरोधाभास पूरे मामले की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा करता है।
अब यह मामला सिर्फ देह व्यापार का नहीं
होटल ट्रिनिटी का यह मामला अब केवल एक स्पा रेड तक सीमित नहीं रहा। यह रायगढ़ में कानून की असली हैसियत तय करेगा—
क्या कानून सबके लिए बराबर है, या बड़े नाम आते ही नियम बदल जाते हैं?
जनता जवाब चाहती है, और अब जवाब से बचना आसान नहीं !

Editor Hemsagar shrivas

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