पुसौर जनपद पंचायत में मनरेगा कार्यों पर सवाल: जियो ट्रैकिंग के नाम पर गड़बड़ी का आरोप !

रायगढ़/ पुसौर:-महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत पुसौर जनपद पंचायत में संचालित कार्यों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में पूर्व में स्वीकृत कार्यों को आनन-फानन में पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि जिन व्यक्तियों ने वास्तविक रूप से मजदूरी नहीं की, उन्हें भी कार्य स्थल पर केवल फोटो और फेस अटेंडेंस के लिए बुलाकर ऑनलाइन जियो ट्रैकिंग कर उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्वीकृत कार्य स्थलों का भौतिक सत्यापन किया जाए तो जमीनी हकीकत अलग नजर आएगी। कई स्थानों पर अधूरे या कागजी कार्यों को पूर्ण दर्शाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि मनरेगा के मूल उद्देश्य—ग्रामीणों को पारदर्शी और सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराना—को आघात पहुंच रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में स्वीकृत लंबित कार्यों को तेजी से पूर्ण दिखाने का दबाव बनाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि आगामी वित्तीय वर्ष में “विकसित भारत जी राम जी योजना” प्रारंभ होने की संभावना के चलते वर्तमान मनरेगा कार्यों की फाइलें शीघ्र बंद करने की कवायद चल रही है। इसी जल्दबाजी में गुणवत्ता और पारदर्शिता से समझौता किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जियो टैगिंग और उपस्थिति की सत्यता का तकनीकी ऑडिट हो तथा दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना की विश्वसनीयता को कैसे बनाए रखता है।



