
रायगढ़। जिले में भू-विस्थापितों एवं प्रभावित परिवारों की लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली गई है। दिनांक 19 जनवरी 2026 को जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने से नाराज लारा संघर्ष समिति ने 24 फरवरी 2026 को छपोरा स्थित एनटीपीसी लारा परियोजना के मुख्य द्वार के सामने पुराने धरना स्थल पर प्रातः सांकेतिक धरना-प्रदर्शन की घोषणा की है।
ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तहत योग्यतानुसार नियमित रोजगार उपलब्ध कराने, रोजगार न मिलने की स्थिति में रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत पिछले लगभग 15 वर्षों से लंबित बेरोजगारी भत्ते का भुगतान कराने तथा भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास से जुड़ी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी।
समिति का आरोप है कि वर्ष 2011 में जिला प्रशासन के माध्यम से बड़ी मात्रा में भूमि परियोजना हेतु हस्तांतरित की गई थी, किंतु छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति का समुचित पालन नहीं किया गया। लैंड बैंक योजना एवं पुनर्वास नीति प्रभावी रूप से लागू न होने की स्थिति में भू-विस्थापितों ने भूमि वापसी की प्रक्रिया निर्धारित करने की भी मांग उठाई है।
लारा संघर्ष समिति के अनुसार, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शासन की पुनर्वास नीति के आधार पर की गई थी, लेकिन आज तक अनेक विस्थापित परिवार अपने अधिकारों से वंचित हैं, जिससे क्षेत्र में गहरा असंतोष व्याप्त है। ज्ञापन सौंपे जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से किसी ठोस पहल का अभाव आंदोलन का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
समिति ने क्षेत्र के सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे 24 फरवरी को प्रस्तावित सांकेतिक धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर भू-विस्थापितों और प्रभावित परिवारों के न्यायपूर्ण अधिकारों के समर्थन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।



