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नवनिर्माण के बैनर तले रामचंद्र शर्मा ने मजदूरों के बीच मनाया श्रमिक दिवस* *सामूहिक बोरे-बासी भोज बना रायगढ़ में श्रमिकों के सम्मान का उत्सव*

 

रायगढ़। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर संस्कारधानी रायगढ़ में छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपरा और श्रमिक सम्मान का अद्भुत संगम देखने को मिला। सामाजिक संगठन नव निर्माण संकल्प समिति के तत्वावधान में आयोजित “सामूहिक बोरे-बासी भोज” कार्यक्रम ने शहर में एक सकारात्मक और जन-समरसता का संदेश देने वाला माहौल निर्मित किया।

कार्यक्रम का नेतृत्व रामचंद्र शर्मा ने किया, जिनके मार्गदर्शन में लगभग 300–400 मजदूरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने इस आयोजन में भाग लेकर बोरे-बासी का आनंद लिया। यह आयोजन न केवल एक परंपरा का पुनर्जीवन था, बल्कि मेहनतकश वर्ग के सम्मान का भी प्रतीक बनकर उभरा। समग्र रूप से यह आयोजन केवल एक भोज नहीं, बल्कि संस्कृति, सम्मान और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आया, जिसने रायगढ़ में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम में नव निर्माण संकल्प समिति के अध्यक्ष रामचंद्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार विनय पांडेय, संस्था के सचिव दीपक मंडल, सामाजिक कार्यकर्ता नीलकंठ साहू, युवा नेता वसीम खान, अज्ञात मल्होत्रा, भरत तिवारी, पत्रकार अनिल प्रधान, सोनू पुरोहित , राकेश साह, सहित संस्था के अन्य कार्यकर्ता और पदाधिकारी के साथ बड़ी संख्या में मजदूर शामिल रहे।

*परंपरा के पुनर्जीवन की पहल*

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के दौरान 1 मई को “बोरे-बासी दिवस” के रूप में मनाने की शुरुआत हुई थी। हालांकि प्रदेश में सरकार बदलते ही समय के साथ यह परंपरा सीमित होती गई, लेकिन रायगढ़ में नव निर्माण संकल्प समिति ने इसे फिर से जीवंत कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्यक्रम पूरे प्रदेश में ऐसा पहला कार्यक्रम है जिसमें सैकड़ो की संख्या में शामिल से लोगों ने भाग लिया है।

*सुबह से उमड़ा जनसमूह*

शनि मंदिर के सामने आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह 9 बजे से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। समाज के हर वर्ग के लोग—मजदूर, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—एक साथ जमीन पर बैठकर बोरे-बासी का सेवन करते नजर आए, जो सामाजिक समानता का सशक्त दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।

*थाली में दिखी छत्तीसगढ़ की आत्मा*

भोज में परोसे गए पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे: दही पानी में डूबा हुआ ठंडा-ताजगी भरा बोरे-बासी
पताल की चटनी, आलू और बड़ी की सब्जी, बिजौरी
हरी मिर्च और प्याज इस पारंपरिक आहार ने न केवल स्वाद का आनंद दिया, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से सामने रखा।

*समरसता और सम्मान का संदेश*

कार्यक्रम संयोजक रामचंद्र शर्मा ने कहा कि
“बोरे-बासी हमारी पहचान है। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना और उन मेहनतकश हाथों को सम्मान देना है, जो देश के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” कार्यक्रम का सफल संचालन समिति के सचिव दीपक मंडल द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि यह आयोजन सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

Editor Hemsagar shrivas

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