महिला सशक्तिकरण सिर्फ कागज़ों में! पुसौर में जनपद सीईओ और बीईओ की निष्क्रियता से महिला खेलकूद प्रतियोगिता बनी औपचारिकता!

रायगढ़ :- महिलाओं को खेल के माध्यम से सशक्त करने की शासन की मंशा पुसौर में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और निष्क्रियता की भेंट चढ़ गई। सहायक संचालक युवा एवं खेल कल्याण विभाग, रायगढ़ द्वारा वर्ष 2025-26, आदेश दिनांक 31/12/2026 के तहत रायगढ़ जिले के सभी विकासखंडों में महिला खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए थे। इसी क्रम में पुसौर के इन्द्रप्रस्थ स्टेडियम में भी प्रतियोगिता आयोजित की गई, लेकिन यह आयोजन जनपद सीईओ पुसौर और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) द्वारा केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित रह गया।

प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, खो-खो, हॉकी, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, कुश्ती, बास्केटबॉल, फुटबॉल और रस्साकशी जैसे खेल शामिल थे। शासन के दिशा-निर्देश स्पष्ट थे—बालिकाओं के लिए 9 से 18 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित की जानी थी। इसके लिए दिनांक 06/01/2026 को विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जनपद सीईओ और सर्व प्राचार्य व संकुल शैक्षिक समन्वयक को पत्र जारी किया गया था l वही जनपद सीईओ पुसौर द्वारा आदेश 2025-26 दिनांक 08/01/2026 को पंचायत स्तर पर सरपंच-सचिव के माध्यम से विकासखंड स्तरीय पंजीयन कराने के निर्देश भी दिए गए।
लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि पंजीयन के पत्र तो जारी हुए, पर उन पर कोई निगरानी, फॉलोअप या जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया। नतीजा यह हुआ कि प्रतियोगिता में केवल 9 से 18 वर्ष की बालिकाएं ही शामिल हुईं, जबकि 18 से 35 वर्ष की एक भी महिला खिलाड़ी मैदान में नहीं उतरी। यह सीधे-सीधे अधिकारियों की निष्क्रियता और उदासीनता को उजागर करता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पंचायत स्तर तक जिम्मेदारी तय थी, तो महिलाओं को जागरूक करने, सूचना पहुंचाने और पंजीयन सुनिश्चित करने में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या महिला सहभागिता को लेकर जनपद सीईओ और बीईओ गंभीर थे, या फिर यह आयोजन सिर्फ रिपोर्ट और फोटो तक सीमित था?
इस पूरे मामले में महिला सशक्तिकरण की बात खोखली साबित होती दिख रही है। यदि समय रहते महिलाओं को प्रेरित किया जाता, पंचायतों और स्कूलों के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जाता, तो सहभागिता शून्य नहीं होती। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन इस लापरवाही का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करे, ताकि भविष्य में शासन की योजनाएं कागज़ों में नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर महिलाओं को वास्तविक लाभ दे सकें।



