झीरम शहादत : भाजपा के अभियान से बड़ी सफलता,उमेश पटेल से जवाब की प्रतीक्षा!!

रायगढ़/छत्तीसगढ़ :- झीरम घाटी नक्सली हमले को आज भी छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे काला अध्याय माना जाता है। इस हमले में तत्कालीन पीसीसी चीफ़ स्व. नंदकुमार पटेल सहित उनके राजनैतिक उत्तराधिकारी बेटे स्व. दिनेश पटेल, स्व. विद्याचरण शुक्ल, स्व. महेंद्र कर्मा जैसे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को नक्सलियों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। यह हमला सिर्फ नेताओं पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा प्रहार था।
पांच साल की सत्ता में रहने के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार झीरम के असली गुनाहगारों को पकड़ने में विफल रही। विडंबना यह रही कि उसी सरकार में शहीद नेता नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल भी शक्तिशाली मंत्री पद पर रहे, फिर भी जांच आगे नहीं बढ़ सकी और झीरम का सच अधूरा ही रह गया।
वहीं दूसरी ओर मौजूदा भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के नेतृत्व में नक्सल विरोधी अभियान को नई रफ़्तार मिली है। माना जा रहा है कि झीरम हमले के मास्टरमाइंड इनामी नक्सली श्याम दादा उर्फ़ चैतू ने अपने साथियों सहित आत्मसमर्पण कर दिया है। इसके अलावा टॉप कमांडर हिडमा को भी सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। यह अभियान नक्सल नेटवर्क की कमर तोड़ने में बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
अब सवाल कांग्रेस से है—क्या वह नक्सली आतंक के समाप्ति अभियान के साथ है या विरोध में? विशेष रूप से कांग्रेस विधायक और शहीद नेता नंदकुमार पटेल के पुत्र उमेश पटेल का बयान इस मुद्दे पर अवश्य आना चाहिए, क्योंकि झीरम की त्रासदी ने सबसे गहरा घाव उनके परिवार को दिया है।
झीरम के शहीदों के न्याय और छत्तीसगढ़ को नक्सल आतंक से मुक्त करने की यह निर्णायक लड़ाई है, जिसमें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक स्वर में खड़े होने की आवश्यकता है।



