क्या खरसिया विधानसभा प्रभारी रजनीश कुमार सिंह भाजपा के जयचंदों से निपट पाएंगे? फोटोबाज़ी और मुद्दाविहीन राजनीति पर उठ रहे सवाल!

रायगढ़/खरसिया :
भारतीय जनता पार्टी ने आगामी चुनावी रणनीति को मजबूत करने के उद्देश्य से खरसिया विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी पूर्व विधायक रजनीश कुमार सिंह को सौंपी है। उनके प्रभारी बनने के बाद क्षेत्र की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। खासकर इसलिए कि खरसिया भाजपा संगठन लंबे समय से आंतरिक कमजोरियों, गुटबाज़ी और कुछ नेताओं की फोटोबाज़ राजनीति के कारण पिछड़ता दिखा है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल गूँज रहा है कि क्या रजनीश सिंह ऐसे नेताओं पर अंकुश लगा पाएंगे जिन्हें पार्टी कार्यों की बजाय केवल मंच पर दिखने, फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया पर प्रचार करने में अधिक रुचि रहती है? ऐसे नेता विपक्ष के लिए मुद्दाविहीन साबित होते हैं और संगठन को मजबूत करने के बजाय भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं।
खरसिया में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस नहीं, बल्कि अपने ही बीच मौजूद वे जयचंद हैं जो समय-समय पर पार्टी की लाइन से हटकर निजी महत्वाकांक्षाओं को तरजीह देते रहे हैं। यही वजह है कि कई बार मजबूत माहौल होने के बावजूद पार्टी को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता। पिछले चुनावों में भी बूथ स्तर पर सक्रियता की कमी और आंतरिक मतभेद ने प्रदर्शन को प्रभावित किया था।
इन परिस्थितियों में रजनीश कुमार सिंह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। संगठनात्मक अनुभव, जनता के बीच मजबूत पकड़ और जमीनी कार्यशैली के कारण उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे निष्क्रिय, फोटोबाज़ और केवल पद की चाह रखने वाले नेताओं को न सिर्फ जिम्मेदारी का अहसास कराएंगे, बल्कि कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाकर मजबूत भाजपा का खरसिया में निर्माण करेंगे।
जनता और कार्यकर्ताओं की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे वास्तव में अनुशासनहीनता और दिखावे की राजनीति करने वाले नेताओं पर कार्रवाई कर, भाजपा को एकजुट कर पाएंगे। खरसिया की राजनीति की अगली दिशा अब रजनीश सिंह की रणनीति पर निर्भर करती है।



