जनपद पंचायत पुसौर : मनरेगा अधिकारियों की मुख्यालय से दूरी, निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल!

पुसौर। जनपद पंचायत पुसौर में मनरेगा कार्यों की निगरानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने दावा किया है कि जनपद के अधिकांश मनरेगा अधिकारी मुख्यालय में निवास नहीं करते, जिससे स्थानीय स्तर पर चल रहे विकास एवं श्रम आधारित कार्यों का निरीक्षण प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों की अनुपस्थिति का सीधा असर ग्रामीणों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं, मजदूरी भुगतान तथा कार्यों की पारदर्शिता पर देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, मनरेगा के अंतर्गत पुसौर क्षेत्र में इस वर्ष वृक्षारोपण कार्यों में भारी अनियमितताएँ सामने आ रही हैं। लगाए गए पौधों की संख्या, उनके संरक्षण, सिंचाई और जीवित पौधों के वास्तविक आंकड़े जमीन पर नजर नहीं आते। जब जिम्मेदार अधिकारी मुख्यालय से ही अनुपस्थित रहते हैं, तो निरीक्षण और सत्यापन का प्रश्न स्वाभाविक रूप से खड़ा होना लाजमी है। कई ग्रामीणों का कहना है कि कागज़ों में दिखाए गए वृक्षारोपण और वास्तविकता में बड़ा अंतर है, जिसकी जांच आवश्यक है।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि जब अधिकारियों की मौजूदगी ही मुख्यालय में नहीं है, तो वे क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में जाकर कार्यों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कैसे कर पाएंगे? मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना, जो ग्रामीणों को रोजगार देने का सबसे बड़ा आधार है, उसमें ऐसी लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।
ग्रामीणों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला मनरेगा अधिकारी का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए मांग की है कि अधिकारियों की मुख्यालय में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। साथ ही वृक्षारोपण सहित अन्य चल रहे कार्यों की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और योजनाओं का सही लाभ ग्रामीणों तक पहुँच सके।



