क्या जनपद पंचायत पुसौर में सीईओ–बीपीएम के संरक्षण में छिप रहा है बिहान योजना का खेल?

रायगढ़/पुसौर :-
जनपद पंचायत पुसौर में बिहान योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिला सशक्तिकरण के नाम पर लाखों रूपये की राशि प्रतिवर्ष जिला पंचायत से भेजी जाती है, ताकि बिहान समूहों की दीदियाँ छोटे-छोटे उद्योग, कौशल विकास और स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ सकें। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिलकुल उलट दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार, जब बीते चार वर्षों की वित्तीय जानकारी मांगी गई—कि किस क्लस्टर को कितनी कितनी राशि मिली हैं. बी ओ क़ो कितनी राशि मिली और बी ओ से एस एच जी क़ो कितनी मिली.!जनपद पंचायत पुसौर के जनसूचना अधिकारी एवं सीईओ द्वारा स्पष्ट जानकारी देने से परहेज़ किया जा रहा है। आवेदन पर सीधा जवाब देने के बजाय गोल-मोल, अस्पष्ट और भ्रामक उत्तर देकर मामले को टालने की कोशिश की जा रही है। सूचना छुपाने का यह रवैया कई सवालों को जन्म देता है।
लोगों का आरोप है कि यदि योजना में कोई अनियमितता नहीं है तो चार वर्षों का ब्योरा देने में दिक्कत कैसी? क्या वास्तव में बिहान योजना की राशि का सही उपयोग हुआ? या फिर कहीं बीपीएम और जनपद सीईओ के संरक्षण में वित्तीय अनियमितताओं का जाल बुना गया है? लगातार बचते जवाब और सूचना देने में देरी, इस संदेह को और गहरा कर रहे हैं।
बिहान योजना का उद्देश्य महिलाओं को मजबूत बनाना है, न कि कागजी उपलब्धियों के आधार पर दिखावटी रिपोर्टें तैयार करना। यदि जनपद पंचायत पुसौर प्रशासन पारदर्शी है, तो उसे तुरंत संपूर्ण वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि सच सामने आ सके।
जनता अब मांग कर रही है—आखिर कब तक जानकारी को छिपाया जाता रहेगा? कब तक जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से भागते रहेंगे? जब तक स्पष्ट, तथ्यात्मक और पूर्ण जानकारी सामने नहीं आती, जनपद प्रशासन पर उठ रहे सवाल थमने वाले नहीं हैं।



