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खरसिया में भाजपा की जीत का रास्ता — AB+ फार्मूला ही बनेगा गेमचेंजर, लेकिन जयचंदों को दरकिनार करना होगा!

रायगढ़ :-खरसिया विधानसभा में पिछले कई चुनावों से भाजपा बार-बार हार का स्वाद चख रही है। कार्यकर्ताओं की मेहनत और क्षेत्रीय मुद्दों के बावजूद पार्टी जीत के करीब पहुँचकर भी लक्ष्य से दूर रह जाती है। अब संगठन के भीतर यह चर्चा तेजी से चल रही है कि यदि भाजपा आगामी चुनाव में AB+ फार्मूला को लागू कर दे, तो वर्षों से कायम हार-जीत का इंतज़ार आखिरकार समाप्त हो सकता है। यह फार्मूला सीधे सांगठनिक शक्ति, बूथ प्रबंधन, जातीय समीकरण और आक्रामक रणनीति पर आधारित माना जा रहा है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल है—क्या भाजपा इस फार्मूला को जमीन पर उतार पाएगी? क्योंकि क्षेत्र में कुछ जयचंद तरह के नेता वर्षों से पार्टी की जीत में रोड़ा बने हुए हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ये नेता चुनाव के वक्त सक्रिय दिखते हैं, लेकिन संगठनात्मक मजबूती, बूथ संचालन या जनसंपर्क के समय गायब रहते हैं। यही नहीं, अंदरूनी राजनीति और व्यक्तिगत हितों के कारण पार्टी का वोट बैंक लगातार बिखरता रहा है।

ऐसे समय में भाजपा के लिए जरूरी है कि प्रभारी नेतृत्व कठोर निर्णय ले और इन जयचंदों को किनारे कर वास्तविक जमीनी कार्यकर्ताओं, युवाओं और समर्पित नेताओं को आगे लाए। AB+ फार्मूला तभी सफल होगा जब इसे कागजों में नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक लागू किया जाए—आक्रामक प्रचार, मजबूत गठजोड़, सक्रिय सोशल मीडिया टीम, दलित-आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में सीधी पैठ, और प्रत्येक कार्यकर्ता तक स्पष्ट रणनीति पहुँचाना अनिवार्य होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खरसिया में भाजपा अगर अब भी ढुलमुल रवैया अपनाती रही, तो परिणाम वही होगा जो वर्षों से होता आया है। लेकिन यदि इस बार प्रभारी टीम बिना दबाव और बिना समझौते के AB+ फार्मूला लागू करती है, तो खरसिया की राजनीतिक तस्वीर बदलने से कोई नहीं रोक सकता। यह चुनाव भाजपा के लिए निर्णायक भी है और आखिरी मौका भी।

Editor Hemsagar shrivas

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