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धान उपार्जन केंद्र चपले में खुला घोटाला, किसान त्रस्त, जिम्मेदार मौन !

खरसिया :- चपले धान उपार्जन केंद्र एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। किसानों का कहना है कि यहां तौल के नाम पर खुलेआम मनमानी की जा रही है। प्रति बोरी धान में 800 से 900 ग्राम तक अतिरिक्त धान लिया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पहले से कर्ज, खाद-बीज और मजदूरी के बोझ तले दबे किसान इस अव्यवस्था से पूरी तरह परेशान हो चुके हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चपले उपार्जन केंद्र में नमी के नाम पर सीधे-साधे किसानों का धान लौटाया जा रहा है। जबकि दूसरी ओर, कुछ प्रभावशाली किसानों का धान बिना नमी जांच के ही खरीदा जा रहा है। यह दोहरा मापदंड न केवल शासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि पूरी खरीदी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर रहा है। किसानों का आरोप है कि अधिकारी, नोडल अधिकारी और स्थानीय प्रभावशाली लोग आपसी सांठगांठ से इस खेल को अंजाम दे रहे हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि किसान अपनी पीड़ा लेकर जब जनप्रतिनिधियों के पास पहुंच रहे हैं, तो उन्हें समाधान के बजाय केवल आश्वासन और फोटो सेशन ही मिल रहा है। नेता मंडी में पहुंचकर किसानों के साथ फोटो खिंचवाते हैं और फिर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें प्रचार नहीं, न्याय चाहिए। उनकी मांग है कि तौल प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो, नमी जांच पारदर्शी ढंग से की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
किसानों का आरोप है कि 5 बोरी धान लेने के बाद रिकॉर्ड में 20 बोरी कटौती दिखाई जा रही है। साथ ही खाद के नाम पर भी अवैध रूप से राशि काटी जा रही है। अनजान किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं।

चपले मंडी क्षेत्र के किसानों को पंजीयन से लेकर धान विक्रय तक हर स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि समय रहते इस घोटाले पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो किसानों का शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा। जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक कार्रवाई करें, न कि केवल कैमरे के सामने खड़े होकर राजनीति करें। किसान आज जवाब मांग रहा है,

Editor Hemsagar shrivas

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