अखाड़े में गूंजेगा देश–विदेश का दमखम, रायगढ़ बना तीन दिवसीय कुश्ती महासंग्राम का केंद्र नेपाल और ईरान के पहलवानों की मौजूदगी, महिला पहलवान भी रचेंगी इतिहास!


रायगढ़ — जिले के जुटमिल क्षेत्र में आज से पारंपरिक खेल प्रेमियों के लिए एक यादगार आयोजन की शुरुआत हो गई। स्वर्गीय रामसुभग सिंह व्यायाम शाला के नेतृत्व में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय कुश्ती प्रतियोगिता ने रायगढ़ को अखाड़े की नगरी में बदल दिया है। इस भव्य दंगल में देश के विभिन्न हिस्सों से आए नामी पहलवानों के साथ नेपाल और ईरान के अंतरराष्ट्रीय पहलवान भी भाग ले रहे हैं, जिससे प्रतियोगिता का स्तर और आकर्षण दोनों बढ़ गए हैं।

आयोजन में बड़ी संख्या में पुरुष पहलवान हिस्सा ले रहे हैं, वहीं 15 महिला पहलवान भी अखाड़े में उतरकर अपनी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन करेंगी!
प्रतियोगिता के दौरान प्रेस वार्ता बातचीत में पहलवानों ने कहा कि कुश्ती युवाओं के लिए अनुशासन और स्वस्थ जीवन की दिशा दिखाने वाला खेल है। यह न केवल शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि मानसिक मजबूती और आत्मसंयम भी सिखाता है। पहलवानों ने यह भी बताया कि कुश्ती से जुड़े खिलाड़ियों को शासन की ओर से खेल कोटे में नौकरी के अवसर मिलते हैं, जिससे यह खेल युवाओं के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
महिला पहलवानों ने बताया कि आज महिलाएं कुश्ती के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। हालांकि ग्रामीण अंचलों में अब भी सामाजिक सोच के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन निरंतर संघर्ष और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएं इस परंपरागत खेल में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।
आयोजन समिति के सदस्य देवेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पिता स्व. रामसुभग सिंह स्वयं कुश्ती के प्रति समर्पित रहे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर वे और उनके बड़े भाई नरेंद्र सिंह बचपन से इस खेल से जुड़े हुए हैं। कुश्ती की विरासत को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को अखाड़े से जोड़ने के उद्देश्य से इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है।
यह आयोजन केवल खेल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि भारतीय कुश्ती परंपरा, संस्कार और सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव है, जो आने वाले तीन दिनों तक रायगढ़ को खेल जगत के मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाएगा।



