गाय-बैल चराने से विधानसभा तक : जनसेवा की जमीन से उठी रामकुमार यादव की प्रेरक कहानी!


सक्ति :-चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामकुमार यादव की जीवन यात्रा केवल राजनीतिक सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, संवेदना और जमीन से जुड़े नेतृत्व की मिसाल है। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव जमगहन में एक गरीब परिवार में जन्मे रामकुमार यादव ने अभावों के बीच वह बचपन जिया, जिसे आज भी ग्रामीण भारत का बड़ा वर्ग जी रहा है। बचपन में उन्होंने हम उम्र बच्चों की तरह गाय-बैल चराए, खेतों में पसीना बहाया और माता-पिता के संघर्ष भरे जीवन को बहुत करीब से देखा।
गरीबी ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के दर्द को समझने की दृष्टि दी। यही कारण रहा कि किशोर अवस्था से ही उनके मन में जनसेवा का बीज अंकुरित होने लगा। गांव के गरीब, मजदूर, किसान और वंचित वर्ग की समस्याओं को उन्होंने केवल देखा ही नहीं, बल्कि उन्हें अपना व्यक्तिगत संघर्ष माना। किसानों के हक, उचित मूल्य, सिंचाई, खाद-बीज और सम्मान के लिए उन्होंने अनेक आंदोलन किए, कई बार सड़कों पर उतरे और सत्ता से सवाल पूछे।

समय के साथ वही गांव का साधारण बेटा जनता की आवाज बन गया। संघर्षों और आंदोलनों की यही पूंजी उन्हें राजनीति में ले आई। आज वही रामकुमार यादव चंद्रपुर क्षेत्र के विधायक हैं, लेकिन सत्ता और पद ने उनकी जड़ों को नहीं बदला। वे आज भी उसी सादगी और आत्मीयता के साथ लोगों से मिलते हैं, जैसी गांव के दिनों में थी।
रामकुमार यादव की सबसे बड़ी पहचान उनका जनता से मानवीय जुड़ाव है। कहा जाता है कि वे छत्तीसगढ़ के ऐसे पहले विधायक हैं, जिनके घर जो भी फरियादी, ग्रामीण या कार्यकर्ता मिलने आता है, उसे भोजन कराए बिना विदा नहीं किया जाता। यह केवल आतिथ्य नहीं, बल्कि उस संस्कार की झलक है, जो उन्होंने अपने माता-पिता से सीखा—कि भूखे को खाना खिलाना सबसे बड़ी सेवा है।

उनका घर आज भी आम आदमी के लिए खुला रहता है। कोई किसान समस्या लेकर आए, कोई गरीब परिवार सहायता की उम्मीद में पहुंचे, विधायक उनसे दूरी नहीं बनाते। यही वजह है कि लोग उन्हें नेता नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानते हैं।
रामकुमार यादव की कहानी यह संदेश देती है कि राजनीति अगर सेवा भाव से की जाए, तो वह समाज को जोड़ने का माध्यम बन सकती है। जमगहन गांव की मिट्टी से निकला यह बेटा आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है—कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों और मन में जनसेवा का भाव हो, तो कोई भी व्यक्ति बदलाव की मिसाल बन सकता है।
चंद्रपुर विधायक की यह यात्रा बताती है कि असली नेतृत्व वही है, जो सत्ता में पहुंचने के बाद भी अपनी जमीन, अपने संस्कार और अपने लोगों को नहीं भूलता।



